ईरान-इजरायल संघर्ष गहराया, G7 ने दी इजरायल को खुली समर्थन की घोषणा मध्य पूर्व में चल रहा ईरान और इजरायल के बीच टकराव अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। पांच दिन से जारी मिसाइल हमलों में दोनों देशों में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। ईरान के हमलों में इजरायल के तेल अवीव, हाइफा और पेटाह टिकवा जैसे शहरों को निशाना बनाया गया, जिसमें 22 इजरायली नागरिकों की मौत हो चुकी है। जवाबी कार्रवाई में इजरायल के हमलों से ईरान में करीब 224 लोगों की जान गई है। इस संघर्ष के बीच कुछ भारतीय छात्र भी फंसे हुए हैं, जिनकी सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
जी7 की सख्त चेतावनी – “ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार नहीं रख सकता” कनाडा में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले नेताओं ने इजरायल को खुला समर्थन दिया है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। जी7 के संयुक्त बयान में इजरायल को आत्मरक्षा का अधिकार दिए जाने के साथ-साथ ईरान से तनाव कम करने की अपील भी की गई। जी7 नेताओं ने यह भी कहा कि मध्य पूर्व में स्थिरता बनाए रखने के लिए गाजा में युद्धविराम की दिशा में प्रयास जरूरी हैं।
चीन ने की मध्यस्थता की पेशकश, शांति वार्ता का समर्थन इस टकराव के बीच चीन ने स्थिति को शांत करने के लिए कूटनीतिक पहल की है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने इजरायल के विदेश मंत्री से फोन पर बात की और दोनों देशों से आपसी मतभेद बातचीत से सुलझाने की अपील की। चीन ने इस संकट को राजनीतिक और शांतिपूर्ण ढंग से हल करने की वकालत की है और भरोसा जताया कि वह इस दिशा में एक रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार है।
भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए उठाए ठोस कदम तनाव के बढ़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने ईरान और इजरायल में रह रहे अपने नागरिकों के लिए 24×7 हेल्पलाइन शुरू की है। नई दिल्ली में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जो वहां फंसे भारतीयों की हर संभव मदद करेगा। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भी इमरजेंसी कॉन्टैक्ट नंबर जारी किए हैं। वहीं, ईरान से भारतीयों का पहला जत्था आर्मीनिया पहुंचने वाला है, जहां से उन्हें स्वदेश लाया जाएगा।
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