प्रवक्ताओं के मानदेय पर उठे सवाल: श्रमिकों से भी कम वेतन, विधायकों ने जताई चिंता - Doonprimenews
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प्रवक्ताओं के मानदेय पर उठे सवाल: श्रमिकों से भी कम वेतन, विधायकों ने जताई चिंता

On: May 27, 2025 9:11 AM
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नैनीताल के स्ववित्तपोषित बीएड कॉलेजों में शिक्षकों को मिल रहे नाममात्र मानदेय को लेकर एक गंभीर बहस छिड़ गई है। आश्चर्य की बात यह है कि पीएचडी और नेट जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाले प्रवक्ताओं को प्रतिपर्याय केवल 250 रुपये दिए जा रहे हैं, जो कि मनरेगा मजदूरों से भी कम है। मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी जहां 252 रुपये है और मिस्त्री को 420 रुपये तक मिलते हैं, वहीं उच्च शिक्षा में शिक्षण का कार्य करने वालों को इससे कम भुगतान करना शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

एमबीपीजी कॉलेज द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में विज्ञान और समाज विज्ञान विषयों के लिए अस्थायी प्रवक्ताओं की नियुक्ति की बात कही गई, जिसमें उन्हें प्रतिक्लास 250 रुपये या महीने के हिसाब से 15,000 रुपये का मानदेय देने की घोषणा की गई। यह स्थिति केवल एक कॉलेज तक सीमित नहीं है—प्रदेश भर के 16 अन्य कॉलेजों में भी बीएड पाठ्यक्रम के लिए यही नियम लागू है। शैक्षणिक योग्यता और निपुणता के बावजूद, इन शिक्षकों को ‘नितांत अस्थायी’ बताकर न्यूनतम भुगतान किया जा रहा है।

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इस मुद्दे पर भाजपा के कई जनप्रतिनिधियों ने अपनी नाराजगी और आश्चर्य जताया है। सांसद अजय भट्ट और विधायक बंशीधर भगत, डॉ मोहन सिंह बिष्ट, और राम सिंह कैड़ा जैसे नेताओं ने माना कि यह विषय उनके संज्ञान में नहीं था और यह स्थिति शिक्षा के मूल्यों के विपरीत है। उनका कहना है कि शासन स्तर पर इस पर पुनर्विचार की आवश्यकता है और योग्य शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय दिलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

नेताओं का कहना है कि शिक्षक समाज की दिशा तय करते हैं और उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार पारिश्रमिक मिलना चाहिए। शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि शिक्षकों को आर्थिक सुरक्षा दी जाए, ताकि वे भविष्य के शिक्षकों को गढ़ने में अपनी पूरी ऊर्जा और समय समर्पित कर सकें। आने वाले समय में इस विषय को मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के समक्ष रखकर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने का आश्वासन भी दिया गया है।

यह भी पढ़ें : अदालत के आदेशों की अनदेखी: नैनीताल हाई कोर्ट में 1000 पार पहुंचीं अवमानना याचिकाएं

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