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उत्तराखंड में पीएनजी और सीएनजी सस्ती, सरकार ने वैट दरों में की बड़ी कटौती

On: March 17, 2025 5:06 PM
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उत्तराखंड सरकार ने राज्य में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की कीमतों में कमी लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन पर लगने वाले मूल्य वर्धित कर (वैट) की दरों में उल्लेखनीय कटौती की है। अब प्रदेश में पीएनजी पर केवल 5 प्रतिशत और सीएनजी पर 10 प्रतिशत वैट लागू होगा। इससे पहले इन पर 20 प्रतिशत वैट लिया जाता था।

वित्त विभाग ने जारी की अधिसूचना, आज से नई दरें लागू

सोमवार को वित्त विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी, जिससे ये नई दरें तुरंत प्रभाव से लागू हो गई हैं। इस फैसले से राज्य में प्राकृतिक गैस के दामों में कमी आएगी, जिससे आम जनता को सीधा लाभ मिलेगा।

उत्तर प्रदेश और हिमाचल से भी सस्ती हुई उत्तराखंड की सीएनजी

अब तक उत्तराखंड में सीएनजी पर अधिक वैट लगने के कारण यह उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की तुलना में महंगी थी। इसका असर यह था कि उत्तराखंड आने वाले वाहन चालक पड़ोसी राज्यों में सीएनजी भरवाना अधिक लाभदायक समझते थे, जिससे प्रदेश में प्राकृतिक गैस की खपत कम हो रही थी और सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा था।

उत्तर प्रदेश में वर्तमान में पीएनजी पर 4 प्रतिशत और सीएनजी पर 12.5 प्रतिशत वैट लागू है, जबकि हिमाचल प्रदेश में पीएनजी पर 10 प्रतिशत और सीएनजी पर 13.75 प्रतिशत वैट लिया जाता है। नई दरें लागू होने के बाद अब उत्तराखंड में सीएनजी पड़ोसी राज्यों से भी सस्ती हो गई है, जिससे प्रदेश में प्राकृतिक गैस की खपत बढ़ने की संभावना है।

सरकार को राजस्व में नुकसान, लेकिन खपत बढ़ने से होगा फायदा

20 प्रतिशत वैट के तहत सरकार को हर साल लगभग 35 से 38 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता था। हालांकि, वैट दरों में कटौती के कारण अब राजस्व में लगभग 15 करोड़ रुपये की कमी आ सकती है। बावजूद इसके, सरकार का मानना है कि प्राकृतिक गैस की कीमतों में कमी आने से इसकी खपत बढ़ेगी, जिससे आने वाले समय में राजस्व में भी वृद्धि होगी।

पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा

इस कदम से न केवल राज्य में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोग प्राकृतिक गैस का उपयोग करें, जिससे राज्य में पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा मिले और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम हो।

सरकार के इस फैसले से वाहन चालकों, घरेलू उपभोक्ताओं और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करने वाले संगठनों को बड़ी राहत मिलेगी।

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