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हल्द्वानी में क्रिकेट के साथ भक्ति की बयार: पूर्व क्रिकेटर श्रीसंत ने की सुविधाओं की तारीफ, कहा- ‘परिवार के साथ जल्द आऊंगा कैंची धाम’

On: March 12, 2026 8:16 AM
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हल्द्वानी के क्रिकेट स्टेडियम में नीली जर्सी पहने पूर्व भारतीय क्रिकेटर एस. श्रीसंत, बैकग्राउंड में उत्तराखंड की खूबसूरत पहाड़ियाँ और मीडिया कर्मी मौजूद हैं।

हल्द्वानी (उत्तराखंड): देवभूमि उत्तराखंड इन दिनों क्रिकेट के सितारों से जगमगा रही है। हल्द्वानी के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित ‘लीजेंड्स क्रिकेट लीग’ (LCL) ने न केवल खेल प्रेमियों में उत्साह भरा है, बल्कि मैदान पर उतर रहे पूर्व दिग्गज खिलाड़ी भी यहाँ की खूबसूरती और मेहमाननवाजी के कायल हो गए हैं। इसी कड़ी में भारतीय टीम के पूर्व तेज गेंदबाज एस. श्रीसंत ने मैदान पर अपनी गेंदबाजी से जलवा बिखेरने के बाद उत्तराखंड की संस्कृति और यहाँ की खेल सुविधाओं की जमकर प्रशंसा की।

पिच और ग्राउंड्समेन की मेहनत को किया सलाम

बुधवार को मुंबई स्पार्टन्स की ओर से खेलते हुए श्रीसंत ने मैच के बाद मीडिया से बातचीत की। उन्होंने विशेष रूप से स्टेडियम के ग्राउंड स्टाफ की सराहना की। श्रीसंत ने स्वीकार किया कि टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले पिच की स्थिति को लेकर टीम और प्रबंधन के मन में कई तरह की आशंकाएं और सवाल थे।

उन्होंने कहा, “ईमानदारी से कहूँ तो हमें डर था कि नया विकेट कैसा व्यवहार करेगा, लेकिन यहाँ के ग्राउंड्समेन ने कमाल कर दिया। बहुत ही कम समय में उन्होंने एक बेहतरीन टर्फ विकेट तैयार किया, जिस पर 40 ओवर का कड़ा मुकाबला देखने को मिला। एक तेज गेंदबाज और एक क्रिकेटर के तौर पर ऐसी गुणवत्ता वाली पिच देखना सुखद है।”

युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगा हल्द्वानी का मैदान

श्रीसंत ने खेल के भविष्य पर जोर देते हुए कहा कि उत्तराखंड में इस तरह के अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों से स्थानीय प्रतिभाओं को नई दिशा मिलेगी। उनका मानना है कि जब हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों के युवा खिलाड़ी अपने सामने अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों को खेलते देखेंगे, तो उनमें भी देश के लिए खेलने का जज्बा पैदा होगा। श्रीसंत के अनुसार, इस स्टेडियम की आधुनिक सुविधाएं आने वाले समय में उत्तराखंड को क्रिकेट के मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करेंगी।

‘जय श्री राम’ के उद्घोष के साथ व्यक्त की कैंची धाम जाने की इच्छा

मैदान पर हमेशा आक्रामक दिखने वाले श्रीसंत हल्द्वानी में एक अलग ही रंग में नजर आए। उन्होंने बातचीत की शुरुआत ‘जय श्री राम’ के जयघोष के साथ की, जिससे वहां मौजूद प्रशंसकों का दिल जीत लिया। श्रीसंत ने बताया कि वे लंबे समय से नैनीताल और उत्तराखंड की वादियों में आने की योजना बना रहे थे।

सबसे खास बात रही बाबा नीम करोली महाराज के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा। श्रीसंत ने कहा, “उत्तराखंड की आध्यात्मिक ऊर्जा अद्भुत है। मेरी दिली इच्छा है कि मैं कैंची धाम जाकर बाबा नीम करोली के दर्शन करूँ। इस बार खेल की व्यस्तता है, लेकिन मैं जल्द ही अपने परिवार के साथ विशेष रूप से कैंची धाम दर्शन के लिए दोबारा आऊंगा।”

दर्शकों के खेल प्रेम ने जीता दिल

हल्द्वानी के दर्शकों की तारीफ करते हुए श्रीसंत भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि अक्सर मैचों में दर्शक किसी एक टीम या खिलाड़ी का समर्थन करते हैं, लेकिन हल्द्वानी का क्राउड अलग था। यहाँ के लोगों ने क्रिकेट की भावना का समर्थन किया। हर अच्छे शॉट और हर अच्छी गेंद पर दर्शकों ने जिस तरह से उत्साहवर्धन किया, वह एक खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होता है।

नैनीताल की खूबसूरती के हुए मुरीद

मैच से इतर, श्रीसंत ने नैनीताल और हल्द्वानी के प्राकृतिक सौंदर्य की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि यहाँ की ताजी हवा और पहाड़ों का दृश्य किसी भी खिलाड़ी की थकान मिटाने के लिए काफी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में यहाँ और भी बड़े टूर्नामेंट्स का आयोजन होगा, जिससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि खेल संस्कृति भी विकसित होगी।

यह भी पढ़ें-देहरादून में गहराया LPG संकट: पश्चिम एशिया की जंग की आंच दून की रसोई तक, बुकिंग ठप, गोदामों पर उमड़ी भीड़

निष्कर्ष

एस. श्रीसंत का यह दौरा न केवल एक खिलाड़ी के रूप में उनकी खेल के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि देवभूमि की आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत के प्रति उनके सम्मान को भी उजागर करता है। हल्द्वानी के मैदान से कैंची धाम की श्रद्धा तक, श्रीसंत का यह सफर उत्तराखंड के खेल इतिहास में एक यादगार अध्याय की तरह दर्ज हो गया है।

मुख्य बिंदु एक नज़र में:

  • टीम: मुंबई स्पार्टन्स
  • स्थान: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, हल्द्वानी
  • प्रशंसा: पिच की गुणवत्ता और ग्राउंड्समेन की कार्यकुशलता
  • आध्यात्मिक झुकाव: कैंची धाम (बाबा नीम करोली महाराज) जाने की इच्छा
  • संदेश: स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा और ‘जय श्री राम’ का अभिवादन।

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