देहरादून: पूर्वी भारत के दो महत्वपूर्ण राज्यों, बंगाल और असम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हालिया चुनावी सफलता ने हिमालयी राज्य उत्तराखंड की राजनीति में एक नई ऊर्जा भर दी है। इस जीत को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि इसने उत्तराखंड भाजपा के कार्यकर्ताओं के लिए ‘बूस्टर डोज’ का काम किया है। असम में भाजपा की जीत की हैट्रिक ने अब उत्तराखंड में भी लगातार तीसरी बार सत्ता का इतिहास रचने की इच्छाशक्ति को प्रबल कर दिया है।
एंटी-इनकंबेंसी को प्रो-इनकंबेंसी में बदलने का मंत्र
भारतीय राजनीति में आमतौर पर सत्ताधारी दलों को ‘एंटी-इनकंबेंसी’ (सत्ता विरोधी लहर) का सामना करना पड़ता है, लेकिन भाजपा शासित राज्यों में एक नया चलन देखने को मिल रहा है—एंटी-इनकंबेंसी को ‘प्रो-इनकंबेंसी’ में बदलना। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड में इसी रणनीति को धरातल पर उतारने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। बंगाल और असम के नतीजों ने यह साबित कर दिया है कि यदि विकास और सुशासन का मॉडल सही हो, तो जनता बार-बार उसी दल पर भरोसा जताती है।
2027 की चुनौती और भाजपा का आत्मविश्वास
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने में अब महज सात माह का समय शेष है (वर्ष 2027)। भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में सत्ता की हैट्रिक लगाने की है। उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में पहले यह माना जाता था कि यहाँ हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन होता है, लेकिन पिछले चुनाव में भाजपा ने इस मिथक को तोड़कर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी। अब असम की ‘हैट्रिक’ उत्तराखंड के लिए एक नई नजीर (उदाहरण) बन गई है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि जो करिश्मा असम में हुआ, वही उत्तराखंड में भी दोहराया जा सकता है।
’डबल इंजन’ और मोदी ब्रांड पर भरोसा
उत्तराखंड में भाजपा की मजबूती का एक बड़ा आधार ‘डबल इंजन’ की सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राज्य के प्रति विशेष लगाव है। बंगाल में जिस तरह से भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के अभेद्य किले में सेंध लगाई, उसने यह संदेश दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा का विजय अभियान किसी भी क्षेत्र में नामुमकिन नहीं है।
राज्य में विपक्षी दल कांग्रेस लगातार एंटी-इनकंबेंसी का मुद्दा उठाने की कोशिश कर रही है, लेकिन भाजपा की तैयारियों और राष्ट्रीय स्तर पर मिल रही जीत ने विपक्ष की रणनीतियों को फिलहाल फीका कर दिया है। मोदी पर आम जनता का अटूट भरोसा कांग्रेस के लिए चिंता का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।
मुख्यमंत्री धामी का बढ़ता कद और स्ट्राइक रेट
इस चुनावी जीत के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कद पार्टी के भीतर और बाहर, दोनों जगह बढ़ा है। धामी ने बंगाल और असम में भाजपा के स्टार प्रचारक के रूप में कई रैलियां की थीं। चुनाव परिणामों में उनका ‘स्ट्राइक रेट’ चौंकाने वाला रहा है, जिससे उनकी लोकप्रियता और संगठनात्मक क्षमता पर मुहर लगी है।
वर्तमान में मुख्यमंत्री धामी न केवल कांग्रेस पर हमलावर हैं, बल्कि वे जनता के बीच जाकर सीधे संवाद करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। विकास परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन और मुख्यमंत्री घोषणाओं को समय पर पूरा करने की उनकी सक्रियता ने जनता की उम्मीदों को नया पंख दिया है। खास बात यह है कि केवल भाजपा शासित विधानसभा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि विपक्ष के विधायकों वाले क्षेत्रों में भी धामी की सक्रियता ने जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ाई है।
निष्कर्ष: इतिहास रचने की ओर उत्तराखंड
बंगाल, असम और पुडुचेरी के चुनावी नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा का चुनावी रथ रुकने वाला नहीं है। उत्तराखंड में भाजपा अब इसी आत्मविश्वास के साथ 2027 के रण में उतरने जा रही है। अगर धामी सरकार विकास और जनता के विश्वास को इसी तरह बरकरार रखती है, तो उत्तराखंड में ‘जीत की हैट्रिक’ का नया इतिहास बनना तय माना जा रहा है








