देहरादून (उत्तराखंड): उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इन दिनों रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। गैस सिलिंडर के लिए मची अफरा-तफरी के बीच दूनवासियों ने अब एक नया विकल्प तलाश लिया है। रसोई में चूल्हा जलता रहे, इसके लिए लोग पारंपरिक गैस सिलिंडर को छोड़कर तेजी से इलेक्ट्रिक किचन उपकरणों की ओर रुख कर रहे हैं।
हालात यह हैं कि शहर के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक बाजारों से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म तक, इंडक्शन चूल्हे और इलेक्ट्रिक कुकर जैसे उत्पाद ‘आउट ऑफ स्टॉक’ होने लगे हैं।
बाजार में अचानक बढ़ी मांग, व्यापारियों के चेहरे खिले
पिछले कुछ दिनों में देहरादून के पलटन बाजार, चकराता रोड और राजपुर रोड स्थित इलेक्ट्रॉनिक शोरूम्स में ग्राहकों की भारी भीड़ देखी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि सामान्य दिनों की तुलना में इंडक्शन स्टोव, इलेक्ट्रिक कुकर, राइस मेकर और एयर फ्रायर की बिक्री में 300% से 400% तक का उछाल आया है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रमुख कारोबारी अमन ग्रोवर ने बताया, “बाजार में स्थिति यह है कि जैसे ही नया स्टॉक आता है, कुछ ही घंटों में बिक जाता है। खासकर बजट श्रेणी के इंडक्शन चूल्हों की मांग सबसे ज्यादा है। हमने कंपनियों को अतिरिक्त स्टॉक के लिए ऑर्डर दे दिए हैं, लेकिन मांग इतनी अधिक है कि आपूर्ति सुचारू करने में समय लग रहा है।”
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ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी ‘नो स्टॉक’ का बोर्ड
यही स्थिति Amazon और Flipkart जैसे ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल्स पर भी देखने को मिल रही है। देहरादून के पिन कोड्स पर कई लोकप्रिय ब्रांड्स के इंडक्शन कुकटॉप और राइस मेकर ‘करेंटली अनअवेलेबल’ या ‘आउट ऑफ स्टॉक’ दिखाई दे रहे हैं। जो मॉडल उपलब्ध हैं, उनकी डिलीवरी में भी सामान्य से अधिक समय लग रहा है।
क्यों बढ़ रही है इलेक्ट्रिक उपकरणों की लोकप्रियता?
गृहिणियों और कामकाजी लोगों का मानना है कि गैस सिलिंडर की अनिश्चितता के दौर में इलेक्ट्रिक उपकरण ही एकमात्र भरोसेमंद सहारा हैं।
- समय की बचत: एयर फ्रायर और राइस मेकर में खाना जल्दी तैयार हो जाता है।
- सुविधा: छोटे परिवारों और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के लिए इलेक्ट्रिक कुकर और रोटी मेकर काफी सुविधाजनक साबित हो रहे हैं।
- विकल्प की कमी: सिलिंडर की बुकिंग के बाद लंबी वेटिंग लिस्ट ने लोगों को बिजली से चलने वाले चूल्हों की ओर धकेल दिया है।
आंकड़ों की जुबानी: दून में गैस संकट का गणित
देहरादून जिले में गैस उपभोक्ताओं की संख्या और वर्तमान मांग-आपूर्ति के बीच का अंतर काफी बड़ा हो गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार स्थिति कुछ इस प्रकार है
| विवरण | आंकड़े (लगभग) |
|---|---|
| कुल घरेलू गैस उपभोक्ता | 7.81 लाख |
| मासिक घरेलू सिलिंडर आपूर्ति | 5.67 लाख |
| वाणिज्यिक (Commercial) उपभोक्ता | 44,201 |
| रोजाना घरेलू खपत | 18,900 सिलिंडर |
| रोजाना कमर्शियल खपत | 1,400 सिलिंडर |
| वर्तमान वेटिंग लिस्ट (घरेलू) | 37,000+ उपभोक्ता |
| वर्तमान वेटिंग लिस्ट (कमर्शियल) | 2,800+ उपभोक्ता |
| ये आंकड़े दर्शाते हैं कि जिले में रोजाना हजारों सिलिंडरों की कमी बनी हुई है, जिसके कारण 37 हजार से अधिक परिवार फिलहाल अपने रिफिल का इंतजार कर रहे हैं। |
रसोई का बजट बिगड़ा
गैस की किल्लत और बिजली के उपकरणों की खरीद ने मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट भी बिगाड़ दिया है। जहाँ एक तरफ लोगों को 2,000 से 5,000 रुपये तक के नए उपकरण खरीदने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अब बिजली के बिल में बढ़ोतरी का डर भी सता रहा है। हालांकि, लोगों का कहना है कि “भूखे रहने से बेहतर है कि बिजली के बिल का थोड़ा अतिरिक्त बोझ सह लिया जाए।”
क्या कहते हैं अधिकारी?
आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी कारणों और लॉजिस्टिक्स में आई बाधा की वजह से आपूर्ति में कुछ रुकावट आई थी, जिसे जल्द ही दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, जब तक गैस की होम डिलीवरी सुचारू नहीं होती, तब तक इलेक्ट्रिक उपकरणों का यह ‘क्रेज’ कम होता नहीं दिख रहा है।
निष्कर्ष
देहरादून में गैस संकट ने न केवल उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ाई है, बल्कि उपभोक्ता व्यवहार (Consumer Behavior) में भी एक बड़ा बदलाव ला दिया है। यदि आने वाले दिनों में गैस आपूर्ति की स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो इलेक्ट्रिक किचन उपकरणों का यह बाजार और भी बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल, दून की रसोई में ‘इंडक्शन’ ही असली ‘किंग’ बना हुआ है।








