नई दिल्ली | विशेष संवाददाता देश की राजधानी दिल्ली के आउटर नॉर्थ जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। नरेला इंडस्ट्रियल एरिया में सड़क किनारे खड़ी एक सफेद रंग की ऑरा कार के भीतर दो व्यक्तियों के शव मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। मृतकों की पहचान विकास और बिजेंद्र उर्फ भोला के रूप में हुई है। पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि यह महज एक हादसा है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है।
कैसे हुआ मामले का खुलासा?
घटना की जानकारी तब मिली जब स्थानीय लोगों ने नरेला इंडस्ट्रियल एरिया थाना क्षेत्र में नाले के पास एक लावारिस कार को लंबे समय से खड़े देखा। कार का नंबर UP-27 CT-7719 बताया जा रहा है। जब राहगीरों को गाड़ी के पास से असहनीय बदबू आने लगी, तो उन्होंने तुरंत इसकी सूचना दिल्ली पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने जब गाड़ी का दरवाजा खोला, तो अंदर का मंजर देख अधिकारियों के भी होश उड़ गए।
गाड़ी के अंदर दो व्यक्ति बेसुध हालत में पड़े थे। पुलिस के अनुसार, कार के शीशे पूरी तरह बंद थे, लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि गाड़ी लॉक नहीं थी। प्राथमिक जांच में शवों की स्थिति को देखकर यह अंदेशा जताया जा रहा है कि मौत काफी समय पहले हो चुकी थी और गर्मी व बंद गाड़ी के कारण शव गलने शुरू हो गए थे।
शराब के तीन पाउच और मौत का कनेक्शन
पुलिस को कार की तलाशी के दौरान कुछ अहम सुराग मिले हैं, जो जांच का मुख्य केंद्र बन गए हैं। कार के अंदर से शराब के तीन पाउच बरामद हुए हैं। पुलिस ने बताया कि इन तीन पाउच में से दो पूरी तरह सीलबंद (Sealed) थे, जबकि एक पाउच खुला हुआ मिला। आशंका जताई जा रही है कि दोनों ने गाड़ी के अंदर शराब का सेवन किया था। जांच अधिकारी अब इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि कहीं शराब जहरीली तो नहीं थी या फिर शराब पीने के बाद बंद गाड़ी में दम घुटने (Asphyxiation) से यह हादसा हुआ।
कौन थे मृतक?
पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर उनकी शिनाख्त की प्रक्रिया शुरू की। मृतकों की पहचान अंबेडकर कॉलोनी, खेड़ा खुर्द निवासी विकास (42 वर्ष) और बिजेंद्र उर्फ भोला (36 वर्ष) के रूप में हुई है।
- विकास: पेशे से ड्राइवर था और गाड़ी की ड्राइवर सीट पर मृत पाया गया।
- बिजेंद्र: प्लंबर का काम करता था और उसका शव पीछे की सीट पर मिला।
दोनों एक ही इलाके के रहने वाले थे और अच्छे दोस्त बताए जा रहे हैं।
CCTV फुटेज से बड़ा खुलासा
पुलिस ने घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगाली है। फुटेज से यह बात साफ हुई है कि यह कार पिछले दिन दोपहर करीब 2 बजे से उसी स्थान पर खड़ी थी। सीसीटीवी में दोपहर 2 बजे के बाद किसी भी व्यक्ति को कार के पास आते या उससे बाहर निकलते हुए नहीं देखा गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों व्यक्ति पिछले 24 घंटों से अधिक समय से कार के भीतर ही थे।
हत्या या हादसा: पुलिस का क्या है कहना?
आउटर नॉर्थ दिल्ली पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में मृतकों के शरीर पर चोट या संघर्ष का कोई बाहरी निशान नहीं मिला है। शुरुआती थ्योरी ‘दम घुटने’ की ओर इशारा कर रही है। अक्सर देखा जाता है कि लोग शराब पीने के बाद इंजन चालू रखकर या शीशे बंद करके सो जाते हैं, जिससे कार के भीतर कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस भर जाती है और सोते हुए ही व्यक्ति की मौत हो जाती है।
हालांकि, पुलिस ने ‘फाउल प्ले’ (साजिश) की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया है। पुलिस का कहना है कि: - क्या उन्हें कोई जहरीला पदार्थ दिया गया था?
- क्या शराब में कुछ मिलाया गया था?
- क्या यह सुनियोजित हत्या है जिसे हादसे का रूप दिया गया?
इन सभी सवालों के जवाब अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक टीम की जांच पर टिके हैं। फॉरेंसिक टीम ने गाड़ी से फिंगरप्रिंट्स और अन्य नमूने एकत्र कर लिए हैं।
निष्कर्ष
फिलहाल पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया है और उनके परिजनों को सूचित कर दिया गया है। नरेला थाना पुलिस मामले की हर एंगल से तफ्तीश कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि विकास और भोला की जान ‘दम घुटने’ से गई या उन ‘तीन पाउच’ में मौत का कोई और सामान छिपा था।










