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थारू लोक संगीत के एक युग का दुखद अंत: सड़क हादसे में मशहूर गायिका रिंकू राणा का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

On: March 5, 2026 11:31 AM
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नानकमत्ता/उधम सिंह नगर: उत्तराखंड के लोक संगीत जगत और थारू जनजाति समाज के लिए एक बेहद हृदयविदारक खबर सामने आई है। अपनी सुरीली आवाज से थारू संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली मशहूर लोक गायिका रिंकू राणा का एक सड़क दुर्घटना में असामयिक निधन हो गया है। इस खबर के फैलते ही ऊधम सिंह नगर जिले सहित पूरे सीमावर्ती क्षेत्रों में मातम पसरा हुआ है।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार, नानकमत्ता कोतवाली अंतर्गत ग्राम कल्याणपुर नोगजा की निवासी रिंकू राणा अपनी भतीजी जिया राणा के साथ किसी निजी कार्य से सितारगंज के सिसौना क्षेत्र गई थीं। कार्य निपटाने के बाद दोनों स्कूटी से वापस अपने घर लौट रही थीं। इसी दौरान नानकमत्ता के बिछपुरी के समीप उनकी स्कूटी की टक्कर एक अनियंत्रित ट्रैक्टर-ट्राली से हो गई।
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि रिंकू राणा सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और उन्हें उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था; अस्पताल पहुँचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे में उनकी भतीजी जिया राणा को भी चोटें आई हैं, जिनका उपचार चल रहा है।
थारू संस्कृति की बुलंद आवाज थीं रिंकू
रिंकू राणा केवल एक गायिका नहीं, बल्कि थारू जनजाति की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की संवाहक थीं। उनके गाए पारंपरिक लोकगीतों में जनजाति समाज की मिट्टी की महक और त्योहारों का उल्लास झलकता था। विशेष रूप से होली के अवसर पर उनके गीतों का पूरे क्षेत्र को बेसब्री से इंतजार रहता था।
हाल ही में हुए होली मिलन समारोहों में उनकी प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया था। उनकी ख्याति केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं थी, बल्कि उत्तर प्रदेश के थारू बाहुल्य क्षेत्रों में भी उन्हें बड़े सम्मान के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धार्मिक जागरणों में आमंत्रित किया जाता था।
आखिरी गीत बना विदाई का पैगाम
हैरानी और दुख की बात यह है कि रिंकू राणा अपनी कला के प्रति अंतिम समय तक समर्पित रहीं। दुर्घटना से महज एक दिन पहले ही उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना नया गीत रिलीज किया था। जिसे उनके प्रशंसकों का भरपूर प्यार मिल रहा था। किसे पता था कि यह गीत उनके जीवन का अंतिम उपहार साबित होगा। आज उनके प्रशंसक उसी गीत को सुनकर अपनी पसंदीदा कलाकार को नम आंखों से श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
रिंकू राणा के पीछे उनके पति महेश राणा और एक पुत्र है। एक हँसते-खेलते परिवार के लिए यह क्षति अपूरणीय है। उनके निधन की सूचना मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे कल्याणपुर गांव में चूल्हे तक नहीं जले हैं।
जनप्रतिनिधियों ने जताया गहरा शोक
रिंकू राणा के निधन को जनजाति समाज के लिए एक बड़ी क्षति बताते हुए क्षेत्र के तमाम दिग्गज नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संवेदना व्यक्त की है। शोक व्यक्त करने वालों में मुख्य रूप से:
* विधायक गोपाल सिंह राणा और पूर्व विधायक डॉ. प्रेम सिंह राणा
* पूर्व ब्लॉक प्रमुख भुवन सिंह राणा एवं दान सिंह राणा
* जिला पंचायत सदस्य मंजू राणा, ग्राम प्रधान रामनरेश राणा
* सामाजिक कार्यकर्ता अशोक राणा, हरिओम राणा, रंजीत राणा व अन्य।
सभी ने एक स्वर में कहा कि रिंकू राणा ने थारू लोक संगीत को जो पहचान दिलाई, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
पुलिस की कार्रवाई
नानकमत्ता पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि ट्रैक्टर-ट्राली और उसके चालक की भूमिका की जांच की जा रही है। दुर्घटना के सही कारणों का पता लगाने के लिए प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ और मामले की विस्तृत छानबीन जारी है।
रिंकू राणा का जाना लोक संगीत की दुनिया में एक ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसे भरना नामुमकिन है। उनकी मधुर आवाज अब केवल रिकॉर्डिंग्स और उनके प्रशंसकों की यादों में गूंजेगी।

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