अहमदाबाद | एअर इंडिया के ड्रीमलाइनर विमान हादसे की जांच में बड़ा कदम उठाया गया है। दुर्घटनाग्रस्त विमान का ब्लैक बॉक्स अब अमेरिका भेजा जाएगा, क्योंकि भारत में उसका डेटा रिकवर करना असंभव बताया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसे के वक्त विमान में 241 लोग सवार थे, जबकि जमीन पर 33 अन्य लोग इसकी चपेट में आ गए। यह हादसा बीते एक दशक का सबसे भयावह विमान हादसा माना जा रहा है, जिसमें कुल 274 लोगों की जान चली गई।
ब्लैक बॉक्स क्यों भेजा जा रहा अमेरिका?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विमान के डेटा रिकॉर्डर को दुर्घटना के बाद लगी आग ने गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है। भारत में तकनीकी संसाधनों की सीमाओं के चलते इसका डेटा निकालना संभव नहीं हो पाया है, इसलिए इसे अमेरिका स्थित विशेष प्रयोगशाला में भेजने की तैयारी की जा रही है।
जांच एजेंसियां मौन, एयर इंडिया का भी जवाब नहीं
हादसे की जांच कर रहे भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है। वहीं, एअर इंडिया ने भी फिलहाल इस मामले पर प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है।
जब एक टेबल बन गई जीवन का कवच
इस भीषण हादसे में जहां सैकड़ों जानें चली गईं, वहीं एक चमत्कारी बचाव की कहानी भी सामने आई है। मेडिकल कॉलेज के छात्र रितेश कुमार, जो घटना के समय अहमदाबाद के एक हॉस्टल मेस में भोजन कर रहे थे, बाल-बाल बच गए।
रितेश ने बताया, “हम मेस में बैठे खाना खा ही रहे थे कि अचानक जोरदार धमाका हुआ और ऊपर से विमान का मलबा गिरने लगा। कुछ समझ ही नहीं आया, तभी एक भारी टेबल मेरे ऊपर आ गिरी, जो मेरी ढाल बन गई।”
बेगूसराय (बिहार) के रहने वाले रितेश को गंभीर चोटें आई हैं और वे फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं। हादसे के करीब पांच घंटे बाद उन्होंने अपनी मां से फोन पर बात कर खुद के जिंदा होने की जानकारी दी।
यह हादसा न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि तकनीकी खामियों और सुरक्षा जांचों को और मजबूत किया जाए। आने वाले दिनों में अमेरिका में ब्लैक बॉक्स विश्लेषण से हादसे की असल वजह सामने आने की उम्मीद है।






