उत्तराखंड में गूंजा 'वंदे मातरम'! 153 शरणार्थियों के माथे पर लगा भारतीय नागरिकता का तिलक, पाकिस्तान से आए 147 हिंदुओं का इंतज़ार खत्म - Doonprimenews
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उत्तराखंड में गूंजा ‘वंदे मातरम’! 153 शरणार्थियों के माथे पर लगा भारतीय नागरिकता का तिलक, पाकिस्तान से आए 147 हिंदुओं का इंतज़ार खत्म

On: February 23, 2026 4:02 PM
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देहरादून, उत्तराखंड: उत्तराखंड ने भारतीय नागरिकता के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) के तहत, राज्य में रह रहे 153 हिंदू शरणार्थियों को आखिरकार भारतीय नागरिकता प्रदान कर दी गई है। यह उन लोगों के लिए एक भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण है, जो दशकों से अपनी मातृभूमि में पहचान और सम्मान के लिए भटक रहे थे। इनमें पाकिस्तान से आए 147 और अफगानिस्तान से आए 6 व्यक्ति शामिल हैं, जिन्हें अब गर्व के साथ भारतीय नागरिक माना जाएगा।
​यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य के गृह विभाग द्वारा एक विस्तृत और गहन जांच-पड़ताल के बाद लिया गया है, जो इन शरणार्थियों के प्रति भारत की मानवीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
​दशकों का इंतजार हुआ खत्म: क्या है CAA?
​नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, जिसे केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में लागू किया था, भारत के नागरिकता अधिनियम 1955 में एक ऐतिहासिक संशोधन है। संसद से पारित और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद, इस कानून ने उन अल्पसंख्यक समुदायों के लिए नागरिकता का मार्ग प्रशस्त किया, जिन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था।
​CAA के तहत, 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत में शरण लेने वाले हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है। यह कानून उन समुदायों के लिए आशा की किरण बनकर आया है, जिन्होंने इन तीन पड़ोसी देशों में अपनी आस्था और जीवन को बचाने के लिए भारत में शरण ली थी।
​उत्तराखंड में आवेदन और स्वीकृति की प्रक्रिया
​CAA लागू होने के बाद, उत्तराखंड में निवास कर रहे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए अनेक व्यक्तियों ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया था। राज्य सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन आवेदनों की बारीकी से जांच की। कई चरणों की सत्यापन प्रक्रिया के बाद, कुल 153 आवेदनों को स्वीकृति मिली है।
​इन नव-नागरिकों में से अधिकांश का संबंध पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान क्षेत्रों से है, जहां वे धार्मिक अल्पसंख्यकों के रूप में जीवन-यापन कर रहे थे। इनके कई परिजन पहले से ही उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों जैसे देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और उधम सिंह नगर में निवास कर रहे थे, जिन्होंने इन शरणार्थियों को आश्रय प्रदान किया। अब ये सभी औपचारिक रूप से भारतीय समाज का हिस्सा बन गए हैं।
​गृह मंत्री अमित शाह करेंगे सम्मान
​इस महत्वपूर्ण अवसर को और भी खास बनाने के लिए, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 7 मार्च को हरिद्वार आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री की उपस्थिति में इन नव-नागरिकों का सम्मान करने की भव्य तैयारी चल रही है। यह कार्यक्रम इन परिवारों के लिए अपनी नई पहचान का जश्न मनाने का एक यादगार पल होगा और देश के प्रति उनके समर्पण को भी दर्शाएगा। सभी संबंधित नागरिकों से संपर्क कर उन्हें इस विशेष कार्यक्रम में आमंत्रित किया जा रहा है।
​मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जताया आभार
​उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस निर्णय का खुले दिल से स्वागत किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा:
“यह निर्णय स्वागत योग्य है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार प्रकट करता हूँ। CAA संशोधन के माध्यम से वर्षों से भटक रहे परिवारों को सम्मान और अधिकार मिला है। यह उन लोगों के लिए एक नई सुबह है, जिन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा उत्पीड़न और अनिश्चितता के बीच बिताया।”
​लंबित आवेदन और भविष्य की राह
​वर्तमान में, केंद्र सरकार के पास अभी भी 45 ऐसे आवेदन लंबित हैं, जिनमें पाकिस्तान से आए व्यक्तियों के 42 और बांग्लादेश से आए व्यक्तियों के 3 आवेदन शामिल हैं। यह दर्शाता है कि अभी भी कई परिवार भारतीय नागरिकता का इंतजार कर रहे हैं। सरकार की यह पहल दर्शाती है कि आने वाले समय में इन लंबित आवेदनों पर भी सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे, जिससे और भी लोगों को भारतीय समाज में सम्मानजनक स्थान मिल सकेगा।
​यह उत्तराखंड और पूरे भारत के लिए एक मानवीय और ऐतिहासिक क्षण है, जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (पूरी दुनिया एक परिवार है) के भारतीय दर्शन को मजबूत करता है।

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