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उत्तराखंड के चीन सीमा के पास 10 गांवों को बनाया जाएगा मॉडल टूरिस्ट विलेज, 75 करोड़ की योजना तैयार

On: July 2, 2025 6:19 AM
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चीन और नेपाल सीमा से लगे 50 गांवों को मॉडल टूरिज्म ग्राम के रूप में मिलेगा नया जीवन, 200 करोड़ से अधिक की योजना तैयार

देहरादून: उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों को नई पहचान देने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम’ तेजी से आकार ले रही है। इस कार्यक्रम के पहले चरण के तहत चीन सीमा से सटे 10 गांवों को थीम आधारित मॉडल पर्यटक ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसके लिए करीब 75 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है। वहीं, दूसरे चरण में नेपाल सीमा से लगे 40 गांवों के लिए भी विकास की ठोस रूपरेखा बनाई जा रही है।

पहले चरण में 10 गांवों को पर्यटन हब बनाया जाएगा

उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के सीमांत क्षेत्रों में बसे 10 गांवों को चयनित कर उन्हें विशेष थीम के आधार पर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। इनमें पिथौरागढ़ का गुंजी गांव शिवधाम, और चमोली का नीती गांव शैव सर्किट के रूप में तैयार होगा। अन्य गांवों को भी उनकी भौगोलिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विशेषताओं के आधार पर विशेष पहचान दी जाएगी।

चयनित गांव इस प्रकार हैं:

जिला

गांव

उत्तरकाशी

जादूंग, बगौरी

चमोली

माणा, नीती

पिथौरागढ़

गुंजी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, नाभी, राककांग, कुटी

इन गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, होमस्टे, ट्रेकिंग रूट, सांस्कृतिक केंद्र, हैंडीक्राफ्ट मार्केट और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कार्य होंगे।

सीएसआर के जरिए बड़े प्रोजेक्ट्स भी प्रस्तावित

चमोली जिले के माणा और नीती गांवों के लिए 131 करोड़ रुपये की लागत से मास्टर प्लान तैयार किया गया है, जिसे कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत क्रियान्वित किया जाएगा।

दूसरे चरण में नेपाल सीमा से लगे 40 गांवों का विकास

हाल ही में घोषित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2.0 के तहत नेपाल सीमा से सटे 40 गांवों को शामिल किया गया है। इनमें चंपावत जिले के 11, पिथौरागढ़ के 24 और ऊधम सिंह नगर जिले के 5 गांव शामिल हैं। इन गांवों में रोजगार, आधारभूत ढांचा, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं सुदृढ़ करने की दिशा में काम होगा।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और सचिव ग्राम्य विकास राधिका झा के नेतृत्व में कार्ययोजना पर काम शुरू हो चुका है। प्रत्येक गांव की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास का खाका तैयार किया गया है।

समीक्षा और निगरानी के लिए ठोस तंत्र

वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम में पारदर्शिता और प्रगति की लगातार समीक्षा के लिए संयुक्त आयुक्त स्तर के अधिकारी को तैनात किया गया है। ये अधिकारी संबंधित जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों (CDO) के साथ समन्वय में रहेंगे।
डैशबोर्ड सिस्टम के जरिये हर 10 दिन में प्रगति की समीक्षा की जाएगी ताकि समयबद्ध रूप से कार्य पूरे हों।

स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार और लौटेगी रौनक

वाइब्रेंट विलेज योजना का उद्देश्य सिर्फ सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि वहां के निवासियों को आजीविका, सुविधा और सम्मानजनक जीवन देना है। पर्यटन की गतिविधियों से न सिर्फ गांव जीवंत होंगे बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।

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