Uttarakhand Rain Alert के चलते राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा अगले कई दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी किए जाने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रशासनिक अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने और किसी भी आपात परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं। राज्य के पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। ऐसे में Uttarakhand Rain Alert को देखते हुए प्रशासन ने राहत एवं बचाव तंत्र को सक्रिय कर दिया है।
Uttarakhand Rain Alert: मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को दिए स्पष्ट निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सचिव आनंद बर्धन और आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के साथ समीक्षा बैठक कर प्रदेश की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि जहां कहीं भी भारी बारिश, भूस्खलन, सड़क अवरुद्ध होने या जलभराव जैसी समस्याएं सामने आएं, वहां जिला प्रशासन तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करे।
मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत एवं बचाव दल पूरी तरह तैयार रहें और प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी परिस्थिति में लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
Uttarakhand Rain Alert: जरूरी सेवाएं बहाल रखने पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यदि बारिश के कारण किसी क्षेत्र में सड़क, बिजली, पेयजल या संचार सेवाएं प्रभावित होती हैं तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया जाए। साथ ही चारधाम यात्रा मार्गों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
राज्य सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि संवेदनशील क्षेत्रों में मशीनरी, राहत सामग्री और आवश्यक संसाधन पहले से उपलब्ध रखें ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।
अगले पांच दिनों तक भारी बारिश की संभावना
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तराखंड के लिए 19 से 23 जुलाई तक विस्तृत मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग के अनुसार राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है।
19 और 20 जुलाई को देहरादून, नैनीताल, चंपावत, ऊधम सिंह नगर, टिहरी, उत्तरकाशी, हरिद्वार, पौड़ी और बागेश्वर जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। कुछ स्थानों पर अत्यधिक वर्षा की भी आशंका जताई गई है।
इसके अलावा 21 जुलाई को देहरादून और बागेश्वर में भी भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है। वहीं 22 और 23 जुलाई को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जैसे पर्वतीय जिलों में लगातार तेज बारिश जारी रहने की संभावना व्यक्त की गई है।
चारधाम यात्रा पर प्रशासन की विशेष नजर
लगातार बारिश के बावजूद चारधाम यात्रा को सुरक्षित बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। विशेष रूप से केदारनाथ यात्रा मार्ग पर आपदा प्रबंधन की सभी एजेंसियां सक्रिय हैं।
एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, डीडीआरएफ, वाईएमएफ और न्यू टास्क फोर्स की टीमें संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी कर रही हैं। किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
केदारनाथ पैदल मार्ग पर नई व्यवस्था लागू
रुद्रप्रयाग जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार के अनुसार, लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर पहाड़ियों से पत्थर और बोल्डर गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि प्रशासन ने प्रभावित हिस्सों को समय-समय पर साफ कर यात्रा मार्ग को फिर से सुचारू बनाया है।
फिलहाल केदारनाथ पैदल मार्ग पैदल यात्रियों के लिए दोनों दिशाओं में खोला गया है, जबकि घोड़ा-खच्चरों की आवाजाही को एकतरफा रखा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रशासन की अपील
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों और चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से मौसम विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पूरी तरह पालन करने की अपील की है।
उन्होंने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में न जाने तथा तेज बहाव वाली नदियों और नालों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने का आग्रह किया। साथ ही किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन या आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
राहत एवं बचाव एजेंसियां अलर्ट मोड पर
राज्य सरकार का कहना है कि सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किए जाएंगे। प्रशासन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारी बारिश के दौरान जनजीवन पर न्यूनतम असर पड़े और किसी भी संभावित आपदा से लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।







