देहरादून (ब्यूरो)।
उत्तराखंड के पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विकास, जल संरक्षण और बंजर भूमि के उपचार को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) 2.0 के अंतर्गत जलग्रहण विकास (Watershed Development) परियोजनाओं को समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए केंद्र ने उत्तराखंड को 31.58 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता मंजूर की है।
इस स्वीकृत राशि के साथ ही केंद्र सरकार ने तत्परता दिखाते हुए पहली किस्त के रूप में 15.79 करोड़ रुपये की राशि राज्य को जारी भी कर दी है।
इस महत्वपूर्ण सौगात की आधिकारिक जानकारी केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक पत्र भेजकर दी है। मुख्यमंत्री धामी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का दिल से आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यह अतिरिक्त वित्तीय सहायता राज्य के दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में जल संकट को दूर करने और किसानों की आय बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी।
सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई परियोजनाओं की अवधि
इस केंद्रीय सहायता की सबसे खास बात यह है कि केंद्र सरकार ने परियोजनाओं को पूरा करने की समय-सीमा को भी बढ़ा दिया है। योजना की मूल अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी थी, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों और बचे हुए कार्यों की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे सितंबर 2026 तक के लिए अस्थायी रूप से विस्तार दिया गया है।
समय-सीमा बढ़ने से अब राज्य सरकार के संबंधित विभागों को अधूरे पड़े जलग्रहण विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने का पर्याप्त अवसर मिल जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली दो तिमाहियों (First Two Quarters) के बजटीय प्रबंधन को सुचारू रखने के लिए ही इस ₹31.58 करोड़ की अतिरिक्त सहायता को मंजूरी दी गई है।
15 परियोजनाओं से चमकेगी 0.84 लाख हेक्टेयर भूमि की किस्मत
केंद्रीय मंत्री द्वारा साझा की गई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021-22 से 2025-26 की अवधि के भीतर उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में जलग्रहण विकास की कुल 15 महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई थी। इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य राज्य के 0.84 लाख हेक्टेयर (84,000 हेक्टेयर) भौगोलिक क्षेत्र का उपचार (Treatment) करना है। इस उपचार के तहत भू-संरक्षण, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और बंजर होती जा रही ढालू भूमि को कृषि योग्य बनाना शामिल है।
इन सभी परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 232.26 करोड़ रुपये है। हिमालयी और विशेष श्रेणी के राज्य होने के नाते, इसमें केंद्र सरकार का अंश (Share) 209.03 करोड़ रुपये निर्धारित है, जो कि कुल लागत का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। केंद्र सरकार अब तक उत्तराखंड को 106.05 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता पहले ही उपलब्ध करा चुकी है, और ताजा किस्त के बाद इस काम में और तेजी आने की उम्मीद है।
पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग पर केंद्रीय मंत्री का जोर
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लिखे पत्र में कुछ आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने आग्रह किया है कि मुख्यमंत्री स्वयं और संबंधित विभागों के शीर्ष अधिकारी क्षेत्रीय स्तर पर तैनात अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी करें।
- समयबद्ध क्रियान्वयन: सभी 15 परियोजनाओं का काम तय टाइमलाइन (सितंबर 2026) के भीतर हर हाल में पूरा हो।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: केंद्र से मिलने वाली पाई-पाई का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ धरातल पर दिखना चाहिए।
- ग्रामीणों को सीधा लाभ: जलग्रहण विकास के तहत जो भी चेकडैम, तालाब या जल संचयन प्रणालियां बनाई जा रही हैं, उनका सीधा लाभ तुरंत ग्रामीण और किसान परिवारों तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाए।
आगामी PMKSY 3.0 में परफॉर्मेंस के आधार पर मिलेगा बजट
केंद्र सरकार ने राज्यों को भविष्य के लिए सचेत करते हुए एक नया पैमाना भी तय कर दिया है। केंद्रीय मंत्री चौहान ने स्पष्ट किया कि आगामी ‘डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 3.0’ (WDC-PMKSY 3.0) के तहत राज्यों को नई परियोजनाओं का आवंटन पूरी तरह से उनके ‘प्रदर्शन’ (Performance Based) पर निर्भर करेगा।
चयन के मुख्य मानदंड:
▪ पुरानी परियोजनाओं को समय पर और बिना देरी के पूरा करना।
▪ केंद्रीय सहायता और जारी किए गए फंड का प्रभावी व शत-प्रतिशत उपयोग।
▪ धरातल पर किए गए निर्माण कार्यों की भौतिक गुणवत्ता (Quality)।
जो राज्य इन पैमानों पर खरे उतरेंगे, उन्हें ही 3.0 संस्करण में ज्यादा बजट और योजनाएं दी जाएंगी। हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने उत्तराखंड की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए भविष्य में भी हर संभव तकनीकी, वैज्ञानिक और संस्थागत सहयोग देने का पूरा भरोसा दिलाया है।
उत्तराखंड के कृषि सेक्टर के लिए क्यों संजीवनी है यह योजना?
उत्तराखंड एक पहाड़ी राज्य है, जहां की कृषि पूरी तरह से मानसूनी बारिश और प्राकृतिक चश्मों (धारे-नौले) पर निर्भर है। पलायन और खेती से विमुख होते युवाओं को रोकने के लिए खेतों तक पानी पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में जलग्रहण विकास परियोजनाएं ग्रामीण आर्थिकी के लिए रीढ़ की हड्डी मानी जाती हैं।
इस अतिरिक्त बजट से न केवल पारंपरिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार होगा, बल्कि पहाड़ों में ‘कंटूर ट्रेंच’ और ‘चाल-खाल’ (पारंपरिक पहाड़ी तालाब) बनाकर भूजल स्तर को सुधारा जा सकेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को तत्काल सक्रिय होने के निर्देश दे दिए हैं ताकि इस अतिरिक्त सहायता का लाभ उठाते हुए उत्तराखंड देश के अग्रणी राज्यों में अपनी जगह पक्की कर सके।








