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उत्तराखंड में इको टूरिज्म के बहाने करोड़ों की हेराफेरी, 1.63 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर

On: July 25, 2025 3:58 PM
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देहरादून – उत्तराखंड वन विभाग एक बार फिर विवादों में है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में हुए चर्चित घोटाले के बाद अब मुनस्यारी में इको टूरिज्म के नाम पर बड़े वित्तीय घपले का मामला उजागर हुआ है। इस प्रकरण में वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी डॉ. विनय भार्गव का नाम सामने आया है, जिन पर करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं, नियमों के उल्लंघन और बिना अनुमति निर्माण कार्य कराने के गंभीर आरोप लगे हैं।

CBI और ED जांच की सिफारिश, शासन ने 15 दिन में मांगा जवाब

वन विभाग ने मामले की गहन जांच के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की सिफारिश की गई है। साथ ही शासन ने डॉ. भार्गव को नोटिस जारी करते हुए 15 दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अगर समय पर जवाब नहीं दिया गया तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

2019 में शुरू हुआ था इको हट्स का निर्माण, 1.63 करोड़ का घोटाला उजागर

यह मामला पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी क्षेत्र का है, जहां वर्ष 2019 में इको टूरिज्म के तहत आरक्षित वन क्षेत्र में डोरमेट्री, वीआईपी हट्स, वन उत्पाद केंद्र और ग्रोथ सेंटर जैसी संरचनाओं का निर्माण कराया गया था। इस परियोजना में लगभग 1.63 करोड़ रुपये के गबन और नियमों की अवहेलना की बात सामने आई है।

IFS डॉ. विनय भार्गव पर लगे हैं ये गंभीर आरोप:

  1. बिना अनुमति संरचनाओं का निर्माण:

आरक्षित वन क्षेत्र में बिना केंद्र सरकार की अनुमति के सीमेंट-मोर्टार से स्थायी प्रकृति की संरचनाएं तैयार की गईं। वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धारा-2 का स्पष्ट उल्लंघन किया गया।

  1. बिना टेंडर करार और खरीददारी:

नियमित टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए निजी संस्था को ठेका दे दिया गया और करोड़ों की सामग्री की सीधी खरीदारी की गई। इससे वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

  1. गैरकानूनी MOU से निजी लाभ:

ईडीसी पातलथौड़, मुनस्यारी के साथ बिना सक्षम प्राधिकरण की अनुमति के समझौता ज्ञापन (MOU) साइन कर लिया गया, जिसके तहत ईको हट्स की 70% आय एक निजी संस्था को हस्तांतरित कर दी गई। बताया जा रहा है कि यह संस्था एक विधायक से जुड़ी है।

  1. फर्जी फायरलाइन खर्च:

जहां वास्तविक कार्य योजना में केवल 14.6 किमी फायरलाइन का उल्लेख था, वहां 90 किमी फायरलाइन दिखाकर फर्जीवाड़ा करते हुए लाखों रुपये का व्यय दिखाया गया।

  1. संदिग्ध ऑडिट और बाहरी फर्म की नियुक्ति:

चार वर्षों (2020–21 से 2023–24) का ऑडिट मुनस्यारी से हजारों किलोमीटर दूर जैसलमेर की एक फर्म से कराया गया। यह प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है।

फिल्म निर्माता भी ठहरे इको हट्स में, VIP सुविधा के आरोप

विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन इको हट्स में फिल्म निर्माता शेखर कपूर के भी ठहरने की पुष्टि हुई है। इसे वीआईपी गेस्ट हाउस के रूप में प्रयोग किया गया, जिससे परियोजना की पारदर्शिता पर और अधिक प्रश्नचिन्ह लगते हैं।

पहले भी लगे थे आरोप, लेकिन बचते रहे भार्गव

डॉ. भार्गव पर इससे पूर्व भी वर्ष 2015 में नरेंद्रनगर में डीएफओ रहते हुए वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगे थे। हालांकि, तब उन्हें अनुभव की कमी बताते हुए दोषमुक्त कर दिया गया था। सूत्रों का दावा है कि वह लगातार प्रभावशाली पदों पर तैनात रहे हैं और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त करते रहे हैं। उनकी शादी एक कैबिनेट मंत्री की भतीजी से हुई है, जिससे उनका रसूख और बढ़ गया।

संपूर्ण जांच रिपोर्ट 700 पन्नों की, दो चरणों में सौंपी गई

वरिष्ठ IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी द्वारा अगस्त से दिसंबर 2024 के बीच इस मामले की विस्तृत जांच की गई थी। उन्होंने 700 पृष्ठों की रिपोर्ट दो भागों में तैयार कर दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में प्रधान मुख्य वन संरक्षक को सौंपी। यह रिपोर्ट मार्च 2025 में शासन को भेजी गई, जिसे जून 2025 में मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित किया गया।

रिपोर्ट में सीबीआई, ईडी जांच के साथ-साथ PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम) के अंतर्गत आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की गई है।

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