ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित तोताघाटी क्षेत्र में पहाड़ियों पर आई गहरी और चौड़ी दरारों ने खतरे की घंटी बजा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन दरारों का आकार और गहराई और बढ़ती है, तो पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा खिसक सकता है। इससे न केवल बदरीनाथ और केदारनाथ धाम का संपर्क ऋषिकेश से कट सकता है, बल्कि पूरे गढ़वाल क्षेत्र की मुख्य लाइफलाइन पर भी संकट आ सकता है।
एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) और लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) की तकनीकी टीमें इस क्षेत्र की बारीकी से निगरानी कर रही हैं। भूगर्भ विज्ञानियों के सहयोग से दरारों का सर्वेक्षण किया जा रहा है और जल्द ही इनका दोबारा गहन अध्ययन किया जाएगा।
हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगर्भ विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. महेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट के अनुसार, तोताघाटी की पहाड़ियां चूना पत्थर से बनी हैं, जिनमें समय के साथ दरारें विकसित होती रहती हैं। उनकी टीम पहले भी कई बार ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर संबंधित विभागों को जानकारी दे चुकी है।
प्रो. बिष्ट ने बताया कि तोताघाटी क्षेत्र की दरारें केवल सतही नहीं हैं, बल्कि ये पहाड़ी की आंतरिक संरचना तक फैली हो सकती हैं। पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में लगभग 300 मीटर की ऊंचाई पर चार बड़ी दरारें देखी गई हैं, जिनकी चौड़ाई 2.5 से 3 फीट तक है। इनकी गहराई का सटीक अंदाजा फिलहाल नहीं लगाया जा सका है।
उन्होंने बताया कि दरारों की निगरानी का यह कार्य अब कम से कम चार माह तक निरंतर किया जाएगा। इस निगरानी से जो आंकड़े प्राप्त होंगे, उन्हें टीएचडीसी (टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के विशेषज्ञों को सौंपा जाएगा। इसके बाद भूगर्भविज्ञानी और अभियंता मिलकर दरारों के कारण और उनके समाधान को लेकर वैज्ञानिक सुझाव देंगे।
फिलहाल संबंधित विभाग अलर्ट मोड पर हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि संभावित आपदा से पहले ही एहतियाती कदम उठाए जा सकें।





