NTA Exam Reforms: 10 Major Suggestions for NEET, CBT Mode
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NTA Exam Reforms: CBT मोड में होगी NEET परीक्षा? संसदीय समिति ने दिए 10 बड़े सुझाव, खाली पद भरने पर भी जोर

On: October 16, 2026 4:36 PM
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NTA Exam Reforms report recommending CBT mode for NEET-UG, secure question banks, government exam centres and recruitment to vacant NTA posts.

NTA Exam Reforms: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में बड़े बदलावों की सिफारिश की गई है। मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 382वीं रिपोर्ट में परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने, प्रश्न-पत्र लीक होने की आशंका कम करने और एजेंसी की कार्यक्षमता सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। रिपोर्ट 9 अक्टूबर 2026 को राज्यसभा के सभापति के समक्ष पेश की गई।

NTA Exam Reforms से जुड़ी इन सिफारिशों में NEET-UG समेत प्रमुख परीक्षाओं को चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित करना, प्रश्न-पत्र परीक्षा के करीब तैयार करना, सरकारी परीक्षा केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाना और एजेंसी में खाली पदों को भरना शामिल है। हालांकि, ये समिति की सिफारिशें हैं। इन्हें लागू करने के लिए संबंधित विभागों और एजेंसी की ओर से आगे निर्णय लिया जाना होगा।

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NTA Exam Reforms: पेपर लीक रोकने के लिए बनेगा बड़ा प्रश्न बैंक

संसदीय समिति का मानना है कि परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपर लीक की आशंका कम करने के लिए एक बड़े, विविध और लगातार अपडेट होने वाले प्रश्न बैंक में निवेश करना जरूरी है। प्रश्न बैंक में अलग-अलग विषयों और कठिनाई स्तरों के पर्याप्त प्रश्न होने चाहिए, ताकि हर परीक्षा के लिए एक ही तरह के प्रश्न-पत्र पर निर्भरता कम की जा सके।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

समिति ने सुझाव दिया है कि प्रश्न-पत्र परीक्षा से कई महीने पहले तैयार करने के बजाय परीक्षा की तारीख के करीब डिजिटल माध्यमों से तैयार किए जाएं। इसके बाद विशेषज्ञों से उनकी जांच कराई जाए। अंतिम प्रश्न-पत्र तैयार करने और उसकी समीक्षा करने वाले विशेषज्ञों को परीक्षा समाप्त होने तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत अलग रखा जाए, ताकि प्रश्नों के बाहर पहुंचने की आशंका कम हो।

इसके लिए NTA को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) और भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के योग्य विशेषज्ञों की मदद लेने का सुझाव दिया गया है। विशेषज्ञों की नियुक्ति से पहले उनकी पृष्ठभूमि, विश्वसनीयता और हितों के टकराव की संभावना की जांच करने पर भी जोर दिया गया है।

NEET-UG समेत परीक्षाओं को CBT मोड में लाने का सुझाव

NTA Exam Reforms के तहत समिति ने NEET-UG सहित अन्य परीक्षाओं को चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी CBT मोड में आयोजित करने की सिफारिश की है। इस व्यवस्था में प्रश्न-पत्र की छपाई और उसे परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की जरूरत कम हो सकती है। इससे पेपर की सुरक्षा से जुड़ी कुछ चुनौतियों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

समिति ने अलग-अलग शिफ्ट में परीक्षा कराने की संभावना का भी समर्थन किया है। हालांकि, ऐसी व्यवस्था में अलग-अलग प्रश्न-पत्रों के कठिनाई स्तर और उम्मीदवारों के अंकों के बीच निष्पक्ष तुलना सुनिश्चित करना जरूरी होगा। इसके लिए नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए और उसका स्वतंत्र ऑडिट कराया जाना चाहिए। उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले यह जानकारी भी दी जानी चाहिए कि अंकों का निर्धारण किस आधार पर होगा।

हर जिले में सरकारी CBT केंद्र बनाने की सिफारिश

परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए समिति ने चरणबद्ध तरीके से 1,000 से अधिक सुरक्षित सरकारी CBT केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हर जिले में कम से कम एक ऐसा केंद्र होना चाहिए और इन केंद्रों का संचालन केंद्र या राज्य सरकारों के नियंत्रण में किया जाना चाहिए।

सरकारी केंद्रों का नेटवर्क बढ़ने से निजी परीक्षा केंद्रों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, परीक्षा के दौरान तकनीकी गड़बड़ियों, सुरक्षा व्यवस्था और उम्मीदवारों की निगरानी को बेहतर तरीके से संभालने की संभावना भी बढ़ेगी। हालांकि, इन केंद्रों को स्थापित करने के लिए पर्याप्त कंप्यूटर, सुरक्षित इंटरनेट व्यवस्था, बिजली, तकनीकी कर्मचारियों और डेटा सुरक्षा जैसे पहलुओं पर ध्यान देना होगा।

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NTA में 41 प्रतिशत पद खाली, भर्ती में तेजी लाने की जरूरत

समिति ने NTA में कर्मचारियों की कमी को भी एक महत्वपूर्ण समस्या बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी में 39 स्वीकृत पदों में से केवल 23 पर अधिकारी तैनात हैं। यानी करीब 41 प्रतिशत पद खाली हैं। समिति ने इन पदों को जल्द भरने और एजेंसी की प्रशासनिक क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया है।

इसके अलावा, परीक्षा संचालन के लिए एक स्थायी और विशेषज्ञ कैडर तैयार करने की जरूरत बताई गई है। समिति का मानना है कि केवल प्रतिनियुक्ति पर निर्भर रहने से संस्थागत अनुभव और निरंतरता प्रभावित हो सकती है। इसलिए एजेंसी में ऐसे कर्मचारियों की व्यवस्था जरूरी है, जिन्हें परीक्षा प्रबंधन, तकनीक, सुरक्षा और शैक्षणिक मूल्यांकन का पर्याप्त अनुभव हो।

परीक्षा एजेंसियों की ब्लैकलिस्ट और जवाबदेही तय करने का सुझाव

NTA Exam Reforms में परीक्षा कराने वाली एजेंसियों और सेवा प्रदाताओं की राष्ट्रीय ब्लैकलिस्ट बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसका उद्देश्य उन एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना है, जिनकी भूमिका में गंभीर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है।

समिति ने NTA की जवाबदेही को मजबूत करने के लिए उपयुक्त संसदीय ढांचा विकसित करने का सुझाव भी दिया है। एजेंसी को केवल परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था के रूप में नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और शोध की जिम्मेदारी निभाने वाले संस्थान के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है।

देर से पहुंचने वाले छात्रों को भी मिले परीक्षा का मौका

समिति ने परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों की बार-बार तलाशी और परीक्षा के दौरान होने वाली अनावश्यक बाधाओं पर भी चिंता जताई है। सुझाव दिया गया है कि जांच की प्रक्रिया परीक्षा शुरू होने से पहले या समाप्त होने के बाद निर्धारित समय में पूरी की जाए। परीक्षा की अवधि के दौरान उम्मीदवारों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देर से पहुंचने वाले छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन उन्हें केवल बचा हुआ समय ही मिले। उन्हें अतिरिक्त समय नहीं दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, परीक्षा के दिन बड़े सार्वजनिक आयोजन, रैलियों और जुलूसों के कारण उम्मीदवारों को आने-जाने में परेशानी न हो, इसके लिए उचित प्रबंधन करने का सुझाव दिया गया है।

NEET में प्रयासों की सीमा और दो-स्तरीय परीक्षा प्रणाली

समिति ने NEET-UG में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के प्रयासों की संख्या और उम्र से जुड़ी उचित सीमाओं पर विचार करने की सिफारिश की है। साथ ही, बड़ी परीक्षाओं के लिए सिविल सेवा परीक्षा की तरह दो-स्तरीय प्रणाली पर काम करने का सुझाव दिया गया है। इसके तहत सामान्य प्रारंभिक परीक्षा के बाद संबंधित पाठ्यक्रमों के लिए अलग-अलग मुख्य परीक्षाएं आयोजित करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।

क्या तुरंत लागू होंगे NTA के नए नियम?

संसदीय समिति की 382वीं रिपोर्ट को 25 अगस्त 2026 की बैठक में स्वीकार किया गया था और 9 अक्टूबर को राज्यसभा के सभापति के समक्ष पेश किया गया। रिपोर्ट तैयार करने के दौरान उच्च शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, NTA के अध्यक्ष और महानिदेशक सहित संबंधित अधिकारियों तथा विशेषज्ञों के विचार लिए गए।

फिलहाल, इन प्रस्तावों को अंतिम लागू नियम नहीं माना जाना चाहिए। आगे संबंधित मंत्रालय और NTA तय करेंगे कि किन सुझावों को किस समयसीमा में लागू किया जा सकता है। यदि इन सिफारिशों पर प्रभावी ढंग से अमल होता है, तो परीक्षा की सुरक्षा, पारदर्शिता और उम्मीदवारों के भरोसे को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

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