अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने मिलकर ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ के तहत आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। मंच ने 10 जनवरी को गांधी पार्क से मशाल जुलूस और 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया है।
मंच की मुख्य मांगें हैं:
• कथित वीआईपी का नाम सार्वजनिक करना
• सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराना
• अंकिता के परिवार के लिए किए गए सरकारी वादों को पूरा करना
आंदोलन का स्वरूप और आयोजक
गुरुवार को प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में मंच से जुड़े संगठनों ने आंदोलन की रूपरेखा और समर्थन की अपील साझा की। महिला मंच की अध्यक्ष कमला पंत ने कहा कि जब तक वीआईपी का नाम उजागर नहीं होता, यह संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है और वनंतरा में साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश का भी खुलासा होना चाहिए।
मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने मुख्यमंत्री पर मामले को भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि अंकिता के माता-पिता तीन वर्षों से सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की प्रतिक्रिया केवल टाल-मटोल करने जैसी रही।
आंदोलन शांतिपूर्ण और जनता का प्रयास
संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्य बताते हैं कि यह आंदोलन किसी एक दल या संगठन का नहीं, बल्कि जनता की साझा लड़ाई है। उन्होंने अंकिता के परिवार से मुलाकात कर उनकी व्यथा और वर्तमान स्थिति को साझा किया। परिवार के सामने अभी भी भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है।
सरकार ने पहले अंकिता के नाम पर नर्सिंग कॉलेज खोलने और उनके बेटे को नौकरी देने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक ये वादे पूरी तरह पूरे नहीं हुए।
पत्रकार वार्ता में कई संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिनमें गजेंद्र भंडारी, सुलोचना इष्टवाल, शांति भट्ट, उमा भट्ट, टीएस नेगी और विनोद धस्माना शामिल थे।
“अंकिता न्याय यात्रा के तहत संगठित संगठन, 10 जनवरी को मशाल जुलूस और 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान
On: January 8, 2026 1:32 PM






