​रुद्रप्रयाग में अलकनंदा उफान पर: चेतावनी के निशान को छू गया जलस्तर, प्रशासन अलर्ट, 12 सड़कें ठप

रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड)।

पहाड़ों में हो रही लगातार मूसलाधार बारिश और बदलते मौसम के कारण उत्तराखंड के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। रुद्रप्रयाग जिले में अलकनंदा नदी का जलस्तर खतरे की घंटी बजाते हुए चेतावनी स्तर (Warning Level) तक पहुंच गया है। नदी के प्रचंड रूप और उफान को देखते हुए स्थानीय जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के साथ-साथ तीर्थयात्रियों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की गई है।

​मौसम विभाग की चेतावनियों के बीच रुद्रप्रयाग जिले में सोमवार सुबह से ही आसमान में घने काले बादलों का डेरा जमा हुआ है, जिससे आगे भी भारी बारिश होने की संभावना जताई जा रही है।

​626.00 मीटर पर पहुंचा अलकनंदा का जलस्तर

​जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) द्वारा जारी की गई ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार सुबह 7:00 बजे की माप (रीडिंग) में अलकनंदा नदी का जलस्तर 626.00 मीटर दर्ज किया गया। यह आंकड़ा नदी के निर्धारित चेतावनी स्तर के ठीक बराबर है। पानी की तेज धार और बढ़ता जलस्तर निचले इलाकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

​वहीं दूसरी ओर, जिले की अन्य प्रमुख नदियों के आंकड़े राहत प्रदान करने वाले हैं:

• ​मंदाकिनी नदी: 624.70 मीटर (चेतावनी स्तर से नीचे)
• ​गंगानगर क्षेत्र: 800.20 मीटर (सुरक्षित सीमा में)
• ​गौरीकुंड क्षेत्र: 1973.80 मीटर (सामान्य स्थिति)

​भले ही मंदाकिनी और अन्य सहायक नदियां फिलहाल चेतावनी स्तर से नीचे बह रही हैं, लेकिन ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) में लगातार हो रही वर्षा के कारण इन नदियों में भी अचानक जलस्तर बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।

​लाउडस्पीकर से मुनादी, तटीय इलाकों में अलर्ट

​अलकनंदा के चेतावनी स्तर को स्पर्श करते ही नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों की टीमों को धरातल पर उतार दिया गया है। संवेदनशील घाटों, बस्तियों और नदी के किनारे बसे इलाकों में वाहन-माउंटेड लाउडस्पीकरों के माध्यम से लगातार चेतावनी प्रसारित की जा रही है।

​प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:

1. ​आम नागरिक, स्थानीय निवासी और तीर्थयात्री नदी के तटों पर अनावश्यक रूप से जाने से बचें।
2. ​घाटों पर जाने, स्नान करने या सेल्फी लेने जैसी लापरवाही बिल्कुल न करें।
3. ​तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग सतर्क रहें और किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थानों की ओर प्रस्थान करने के लिए तैयार रहें।

​24 घंटों में बारिश के आंकड़े और मौसम का मिजाज

​पहाड़ों पर बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान रुद्रप्रयाग जिले के विभिन्न हिस्सों में दर्ज की गई वर्षा का ब्योरा इस प्रकार है:

• ​जखोली तहसील: 25.00 मिमी (सर्वाधिक वर्षा)
• ​ऊखीमठ तहसील: 12.50 मिमी
• ​रुद्रप्रयाग तहसील: 4.00 मिमी

​मौसम केंद्र के अनुसार, जिले में तापमान न्यूनतम 23°C और अधिकतम 29°C के आसपास रहने का अनुमान जताया गया है। हवा में अत्यधिक नमी और घने बादलों की वजह से आने वाले घंटों में तीव्र वर्षा की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

​12 सड़कें बंद: यातायात और संपर्क मार्ग प्रभावित

​बारिश और भूस्खलन (Landslides) का सीधा असर जिले के सड़क नेटवर्क पर पड़ा है। पहाड़ी इलाकों में चट्टानें खिसकने और मलबे के सड़कों पर आने से कुल 12 मार्ग बाधित हो गए हैं।

अवरुद्ध मार्गों की स्थिति:

• ​राष्ट्रीय राजमार्ग (NH): गनीमत यह है कि जिले से गुजरने वाले सभी प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग फिलहाल खुले हैं और यातायात संचालित हो रहा है।
• ​राज्य मार्ग (State Highway): 1 मार्ग बंद।
• ​लोक निर्माण विभाग (PWD) मार्ग: 4 संपर्क मार्ग बंद।
• ​प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY): ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाली 6 सड़कें मलबे के कारण ठप हैं।
• ​एनपीसीसी (NPCC) मार्ग: 1 सड़क मार्ग अवरुद्ध है।

​सड़कों के बंद होने से ग्रामीण इलाकों का तहसील और जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है। हालांकि, लोक निर्माण विभाग और संबंधित कार्यदायी संस्थाएं जेसीबी मशीनों के साथ मार्गों को दोबारा खोलने के कार्य में जुटी हुई हैं।

​प्रशासन की सख्त हिदायत और आपातकालीन तैयारियां

​आपदा प्रबंधन अधिकारी और जिलाधिकारी ने सभी संबंधित रेस्पॉन्स विभागों—जैसे पुलिस, एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF), स्वास्थ्य विभाग और सिंचाई विभाग—को अलर्ट मोड पर रहने के आदेश दिए हैं।

​प्रशासन ने विभागों को निर्देशित किया है कि:

• ​किसी भी प्रकार की भूस्खलन या आपदा की सूचना मिलने पर प्रतिक्रिया समय (Response Time) न्यूनतम होना चाहिए।
• ​खोज एवं बचाव (Search & Rescue) दल आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात रहें।
• ​किसी भी मार्ग के अवरुद्ध होने या दुर्घटना की जानकारी बिना किसी देरी के जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) को दी जाए ताकि तुरंत राहत कार्य शुरू किया जा सके।

​आपदा प्रबंधन टीम ने जिले के नागरिकों से धैर्य बनाए रखने, अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।

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