अल्मोड़ा हादसा: रानीखेत के तितालीखेत में 150 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, दो लोगों की दर्दनाक मौत; राहत एवं बचाव कार्य में जुटी पुलिस - Doonprimenews
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अल्मोड़ा हादसा: रानीखेत के तितालीखेत में 150 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, दो लोगों की दर्दनाक मौत; राहत एवं बचाव कार्य में जुटी पुलिस

On: June 5, 2026 8:56 PM
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​रानीखेत (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रफ्तार का कहर और संकड़े पहाड़ी रास्ते आए दिन बेगुनाह जिंदगियों को लील रहे हैं। ताजा मामला अल्मोड़ा जिले के रानीखेत तहसील अंतर्गत ताड़ीखेत ब्लॉक से सामने आया है, जहां एक अनियंत्रित कार करीब 150 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। इस दर्दनाक हादसे में कार सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

दुर्घटना इतनी भीषण थी कि वाहन के परखच्चे उड़ गए। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस, राजस्व टीम और स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद शवों को खाई से बाहर निकाला। मृतकों में से एक की पहचान हो चुकी है, जबकि दूसरे की शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं।

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​तितालीखेत के पास हुआ भीषण हादसा

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​प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हृदयविदारक घटना रानीखेत तहसील के सौनी बिनसर क्षेत्र के तितालीखेत (ताड़ीखेत ब्लॉक) में घटित हुई। एक कार (पंजीकरण संख्या: CH 01 CB 5868) अचानक अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे करीब 150 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। पहाड़ी से टकराते हुए नीचे गिरने के कारण कार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार दोनों व्यक्तियों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।


​पहाड़ी रास्तों में सन्नाटा होने और गहरी खाई होने के कारण शुरुआत में किसी को भी घटना की भनक नहीं लगी। मंगलवार दोपहर करीब 1:30 बजे वहां से गुजर रहे एक राहगीर की नजर खाई में गिरे वाहन पर पड़ी, जिसके बाद उसने तुरंत आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल करके पुलिस को इस बड़ी दुर्घटना की सूचना दी।

​SDRF और पुलिस टीम ने चलाया संयुक्त रेस्क्यू अभियान

​सड़क हादसे की सूचना मिलते ही कोतवाली रानीखेत पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपनिरीक्षक (SI) हेमा कार्की, उपनिरीक्षक कैलाश चंद्र, हेड कांस्टेबल प्रवीण कुमार और होमगार्ड के जवान आनंद व ज्योति तुरंत दलबल के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुए। इसके साथ ही राजस्व पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को भी मौके पर बुलाया गया।


​घटनस्थल पर पहुंचे सुरक्षाकर्मियों ने जब 150 मीटर नीचे खाई में झांका, तो हालात बेहद संवेदनशील थे। कार पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुकी थी। स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों ने फौरन रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। उबड़-खाबड़ और बेहद ढलान वाले रास्ते से होते हुए जवान खाई में उतरे और दोनों शवों को अपने कब्जे में लिया। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने स्ट्रेचर और रस्सियों की मदद से भारी मशक्कत कर दोनों शवों को मुख्य सड़क तक पहुंचाया। पुलिस ने दोनों शवों को सुपुर्दगी में लेकर पंचनामा भरने की वैधानिक कार्रवाई पूरी की और उन्हें पोस्टमार्टम के लिए रानीखेत संयुक्त चिकित्सालय भिजवा दिया है।

​मोबाइल पर आई घंटी से हुई एक मृतक की पहचान

​हादसे का शिकार हुए दोनों व्यक्तियों के पास से शुरुआत में तलाशी के दौरान कोई भी पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस या ऐसा दस्तावेज नहीं मिला जिससे उनकी पहचान हो सके। दोनों की शिनाख्त पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। इसी बीच, घटनास्थल पर बिखरे सामान के बीच पड़े एक मोबाइल फोन पर अचानक घंटी बजी।


​पुलिस अधिकारियों ने जब फोन रिसीव किया, तो दूसरी तरफ से आ रही कॉल की मदद से एक मृतक की शिनाख्त हो सकी। मृतक की पहचान जीवन चंद्र जोशी (पुत्र पूरन चंद्र जोशी) के रूप में हुई है, जो कि बिठोरिया नंबर-एक, हल्द्वानी के निवासी थे। पहचान होने के बाद पुलिस ने तत्काल हल्द्वानी में रह रहे उनके परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना दी। घर में जैसे ही जीवन चंद्र की मौत की खबर पहुंची, कोहराम मच गया और परिजन रोते-बिलखते रानीखेत के लिए रवाना हो गए।


​दूसरे मृतक की शिनाख्त अभी बाकी: पुलिस के मुताबिक, दूसरे मृतक के पास से फिलहाल कोई सुराग नहीं मिल पाया है। शव को अस्पताल के मोर्चरी में सुरक्षित रखवा दिया गया है। पुलिस सोशल मीडिया और आस-पास के थानों के माध्यम से उसकी पहचान स्थापित करने की कोशिश कर रही है।

​दुर्घटना के कारणों की जांच में जुटी पुलिस

​पहाड़ के इस शांत इलाके में हुए इस दर्दनाक हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रानीखेत के एसआई कैलाश चंद्र ने बताया कि दुर्घटना वास्तव में किस समय और किन परिस्थितियों में हुई, इसकी अभी सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है। पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर मामले की विस्तृत जांच कर रही है।


​यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या यह हादसा वाहन की तेज रफ्तार के कारण हुआ, मोड़ पर नियंत्रण खोने से हुआ या फिर सामने से आ रहे किसी अन्य वाहन को बचाने के चक्कर में कार खाई में उतरी। इसके अलावा, पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि कहीं वाहन में कोई तकनीकी खराबी जैसे कि ब्रेक फेल होना या स्टीयरिंग लॉक होना तो हादसे की वजह नहीं थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों और समय का पूरी तरह से खुलासा हो सकेगा।

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​पहाड़ी मार्गों पर बढ़ता जा रहा है हादसों का ग्राफ

​उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में इस प्रकार के सड़क हादसे लगातार आम होते जा रहे हैं, जो बेहद चिंता का विषय है। अल्मोड़ा, नैनीताल, और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में लगातार होते वाहन हादसों के पीछे कई कारण सामने आते रहे हैं:

  • ​अंधाधुंध गति और ओवरटेकिंग: संकड़े पहाड़ी मोड़ों पर तेज रफ्तार और गलत तरीके से ओवरटेक करना सबसे बड़ा कारण बनता है।
  • ​थकान और झपकी आना: मैदानी क्षेत्रों से लंबी दूरी तय कर पहाड़ आ रहे चालकों को अक्सर नींद की झपकी आ जाती है, जिससे वाहन से नियंत्रण छूट जाता है।
  • ​सड़कों की स्थिति और क्रैश बैरियर की कमी: कई संवेदनशील मोड़ों पर क्रैश बैरियर या सुरक्षा दीवारें नहीं होती हैं, जिससे मामूली संतुलन बिगड़ने पर भी वाहन सीधे गहरी खाई में समा जाते हैं।

​स्थानीय प्रशासन और राजस्व पुलिस ने एक बार फिर वाहन चालकों से अपील की है कि वे पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करते समय बेहद सतर्क रहें, गति सीमा का पालन करें और विशेष रूप से तीव्र मोड़ों पर हॉर्न का प्रयोग अवश्य करें ताकि ऐसे दर्दनाक हादसों से कीमती जानों को बचाया जा सके।

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