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देहरादून में नस्लीय टिप्पणी का विरोध करना पड़ा भारी, त्रिपुरा के छात्र की बेरहमी से हत्या

On: December 28, 2025 4:42 AM
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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में नस्लीय टिप्पणी का विरोध करने पर त्रिपुरा के एक आदिवासी छात्र की बेरहमी से हत्या का मामला सामने आया है। पीड़ित छात्र अंजेल चकमा, जो देहरादून स्थित जिज्ञासा विश्वविद्यालय में एमबीए के अंतिम वर्ष का छात्र था, पर 9 दिसंबर को सेलाक्वी इलाके में जानलेवा हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल अंजेल ने कई दिनों तक अस्पताल में इलाज के बाद दम तोड़ दिया। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर त्रिपुरा लाया गया, जहां घटना को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला।
देहरादून में हुई इस दर्दनाक घटना की खबर जैसे ही त्रिपुरा पहुंची, पूरे राज्य में शोक और गुस्से का माहौल बन गया। अंजेल चकमा मूल रूप से त्रिपुरा का निवासी था और पढ़ाई के सिलसिले में देहरादून में रह रहा था।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, 9 दिसंबर की शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच अंजेल अपने छोटे भाई माइकल चकमा के साथ सेलाक्वी क्षेत्र में किराने का सामान खरीदने गया था। उसी दौरान शराब के नशे में धुत कुछ लोगों ने दोनों भाइयों पर नस्लीय और अपमानजनक टिप्पणियां कीं।
जब अंजेल और उसके भाई ने इस अभद्रता का विरोध किया, तो आरोपियों ने हिंसक रूप अपना लिया। हमलावरों ने माइकल पर हमला कर उसे घायल कर दिया, जबकि अंजेल पर चाकू से वार किया गया। गंभीर चोट लगने के बाद अंजेल को तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने कई दिनों तक जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष किया, लेकिन आखिरकार शुक्रवार को उसकी मौत हो गई।
त्रिपुरा में अंतिम संस्कार, उमड़ा जनसैलाब
अंजेल चकमा का शव दिल्ली के रास्ते अगरतला लाया गया। महाराजा बीर बिक्रम हवाई अड्डे पर परिवार के सदस्यों, सामाजिक संगठनों और कई राजनीतिक नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव उनाकोटी ले जाया गया। अंतिम संस्कार से पहले ही उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए, जो इस घटना के खिलाफ गुस्सा और दुख जाहिर कर रहे थे।
केंद्र सरकार से कार्रवाई की मांग
अंजेल चकमा की मौत के बाद परिजनों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि इस जघन्य अपराध के दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए। साथ ही, उत्तर-पूर्वी राज्यों के छात्रों और युवाओं के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाली नस्लीय टिप्पणियों और भेदभाव को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।
यह घटना न सिर्फ एक छात्र की दर्दनाक मौत है, बल्कि देश में नस्लीय भेदभाव के खिलाफ गंभीर सवाल भी खड़े करती है।

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