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जंतर-मंतर गाली विवाद: पीएम मोदी की देशवासियों और Gen Z से खास अपील, बोले- ‘गालियां सुन दुख हुआ, पर बच्चों को माफ कर सही राह दिखाना हमारा फर्ज’

On: August 1, 2026 6:44 AM
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Prime Minister Narendra Modi delivering a video message addressing Gen Z and youth regarding the Jantar Mantar protests

नई दिल्ली।

जंतर-मंतर पर हाल ही में समाप्त हुए छात्र आंदोलन के दौरान उठी अभद्र भाषा की लहर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘इंस्टाग्राम’ पर देर रात एक भावुक वीडियो संदेश जारी करते हुए पीएम मोदी ने युवाओं, खासकर Gen Z (युवा पीढ़ी) को संबोधित किया।


प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान न केवल उनके, बल्कि उनकी स्वर्गीय माताजी के खिलाफ भी बेहद भद्दी और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिसने उन्हें और देश के सभ्य समाज को गहरा दुख पहुँचाया है।

​इसके बावजूद, पीएम मोदी ने समाज से इस आक्रोश को शांत करने और युवा प्रदर्शनकारियों को दंडित करने के बजाय उन्हें माफ कर सही राह दिखाने की पुरजोर अपील की है।

​’सभ्य समाज में ऐसी भाषा ठीक नहीं, पर सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है’

​प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि वह नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान पैदा हुए जनाक्रोश को अच्छी तरह समझते हैं। लेकिन जिस तरह से विरोध प्रदर्शनों में अमर्यादित भाषा का सहारा लिया गया, वह चिंताजनक है।

पीएम मोदी ने कहा:

“कुछ शरारती बच्चों ने मेरे और मेरी स्वर्गीय माताजी के खिलाफ बेहद गंदी गालियों का इस्तेमाल किया। सभ्य समाज में इस तरह की भाषा के लिए कोई जगह नहीं हो सकती। केवल मुझे ही नहीं, मेरी मां को भी घसीटा गया, जबकि गालियां कभी किसी समस्या का हल नहीं हो सकतीं।”

​प्रधानमंत्री ने आगे एक बड़ा दिल दिखाते हुए कहा कि हमें इन भटक चुके बच्चों को सजा देने के बजाय उन्हें सही दिशा में ले जाना होगा। बचपन और युवावस्था में हमेशा अपनी गलतियों को सुधारने और उनसे सीखने की गुंजाइश बनी रहती है।

​बेटियों द्वारा अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर पीएम ने जताया ‘कल्चर शॉक’

​प्रधानमंत्री ने अपने वीडियो संदेश में विशेष रूप से देश की बेटियों द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर चिंता जाहिर की। उन्होंने इसे एक ‘सांस्कृतिक झटका’ (Culture Shock) करार देते हुए कहा कि हमारी सांस्कृतिक परंपराओं में महिलाओं और बेटियों से इस प्रकार की भाषा की अपेक्षा नहीं की जाती।

​उन्होंने कहा, “यह बेहद चिंता का विषय है कि हमारी बेटियां इस प्रकार की अभद्र भाषा का प्रयोग कर रही हैं। लेकिन इसके बावजूद, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ये हमारे अपने ही बच्चे हैं। इन्हें माफ करना और सही राह पर लाना हमारी और पूरे समाज की जिम्मेदारी है।”

​’दांत गलती से जीभ को काट ले तो दांत तोड़ा नहीं जाता’

​अपने संदेश को और अधिक स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने समाज को एक बहुत ही संवेदनशील और व्यावहारिक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर भोजन करते समय गलती से हमारा दांत हमारी ही जीभ को काट ले, तो हम गुस्से में आकर अपने दांत को नहीं तोड़ देते, क्योंकि दोनों ही हमारे शरीर का हिस्सा हैं।

​उसी प्रकार, देश के ये युवा और बच्चे भी हमारे अपने ही परिवार का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ने अपील की कि इन युवाओं को अदालतों के चक्कर कटवाने या कानूनी कार्रवाइयों से दंडित करने से इस समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं निकलने वाला। यह समय समाज द्वारा इन बच्चों को गले लगाने और उनके भविष्य को दिशा देने का है।

​’मैं आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए जीता हूँ’ — युवाओं को पीएम का संदेश

​युवा प्रदर्शनकारियों और छात्रों को सीधे संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने उनसे अतीत को पीछे छोड़ देश के निर्माण में योगदान देने की बात कही। उन्होंने कहा:

“मैं इन सभी साथियों से कहना चाहता हूँ कि देश बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और आप सभी को भी आगे बढ़ना चाहिए। नई बातें सीखें, अपनी गलतियों से सबक लें और आगे बढ़ें। मैं आपके ही उज्ज्वल भविष्य के लिए दिन-रात काम करता हूँ। आइए, हम सब मिलकर देश को सशक्त बनाएं।”

​क्या था जंतर-मंतर आंदोलन का पूरा मामला?

​गौरतलब है कि नीट परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर जंतर-मंतर पर करीब 36 दिनों तक लंबा छात्र आंदोलन चला। कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में 20 जून को शुरू हुआ यह प्रदर्शन 25 जुलाई को तब समाप्त हुआ, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ-साथ सरकार ने छात्रों की सभी प्रमुख मांगें स्वीकार कर लीं।
​इस आंदोलन को देशभर के हजारों छात्रों और प्रमुख विपक्षी दलों का पुरजोर समर्थन मिला था।

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हालांकि, प्रदर्शन के अंतिम दिनों में कुछ युवाओं द्वारा दिए गए भड़काऊ बयानों और अभद्र भाषा के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे, जिसके बाद समाज के विभिन्न वर्गों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।

​पीएम मोदी के इस उदारवादी रुख और ‘माफ करने’ वाले संदेश के बाद अब इस पूरे विवाद के शांत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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