देहरादून। उत्तराखंड का छोटा सा कस्बा कीर्तिनगर ठोस कूड़ा प्रबंधन में वह करिश्मा कर गया है, जिसकी राजधानी देहरादून अब तक सिर्फ योजनाएं ही बनाती रह गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कीर्तिनगर के नवाचार की सराहना करते हुए इसे देशभर के लिए प्रेरणास्रोत बताया। इस प्रशंसा ने जहां कीर्तिनगर को राष्ट्रीय मान्यता दिलाई, वहीं देहरादून की कार्यशैली पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
प्रधानमंत्री ने कीर्तिनगर को बताया उदाहरण
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कीर्तिनगर के नागरिकों ने कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में जो अनुकरणीय प्रयास किए हैं, वह साबित करते हैं कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती। उन्होंने यह भी कहा कि कीर्तिनगर ने सामुदायिक भागीदारी, पारदर्शिता और नवाचार के जरिए स्वच्छता के क्षेत्र में मिसाल कायम की है।
देशभर में चर्चा का केंद्र बना कीर्तिनगर
नगर पंचायत कीर्तिनगर ने बीते वर्षों में कूड़ा प्रबंधन को लेकर जो ठोस कदम उठाए, उन्होंने पूरे सिस्टम को व्यवस्थित और प्रभावशाली बना दिया। घर-घर से कूड़ा संग्रह, गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण, स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और आधुनिक तकनीकों के समावेश ने इस कस्बे को देशभर में पहचान दिला दी है।
देहरादून के लिए चेतावनी की घंटी
कीर्तिनगर की सफलता जहां प्रदेश के लिए गौरव की बात है, वहीं देहरादून जैसे राजधानी शहर के लिए यह एक कटु सच्चाई भी है। हालिया स्वच्छ सर्वेक्षण में देहरादून को देशभर में 62वां स्थान मिला है। यह रैंकिंग पिछले वर्ष से छह अंक बेहतर जरूर है, लेकिन राजधानी से उम्मीदें कहीं अधिक होती हैं।
दून में अभी भी कचरे के उठान की व्यवस्था बिखरी हुई है। गीले और सूखे कचरे को अलग करने की प्रक्रिया न के बराबर है और वैज्ञानिक निस्तारण की दिशा में नगर निगम के प्रयास बेहद कमजोर हैं।
मुंबई से सीखा, कीर्तिनगर से नहीं
हैरानी की बात यह है कि हाल ही में देहरादून नगर निगम की टीम ठोस कचरा प्रबंधन का अध्ययन करने मुंबई गई थी। जबकि अपने ही राज्य का एक छोटा कस्बा—कीर्तिनगर—देशभर के लिए रोल मॉडल बन चुका है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या देहरादून प्रशासन की प्राथमिकताएं सही दिशा में हैं?
क्या देहरादून सीखेगा अपने ही राज्य से?
अब समय आ गया है कि देहरादून की नगर पालिका और प्रशासन स्वच्छता के प्रति अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करे और कीर्तिनगर जैसे उदाहरणों से सीख ले। क्योंकि स्वच्छता केवल पुरस्कारों या सर्वेक्षणों की बात नहीं, यह नागरिकों के जीवन स्तर और शहर की पहचान से जुड़ा अहम मुद्दा है।





