बिहार की राजधानी पटना स्थित नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (NMCH) इन दिनों अपनी लचर व्यवस्था और गंभीर लापरवाहियों को लेकर सुर्खियों में है। कभी यहां शव से आंखें गायब हो जाती हैं, तो कभी मरीज की उंगलियां चूहे कुतर जाते हैं। इन घटनाओं ने एक बार फिर अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। लेकिन इन सवालों का जवाब देने और व्यवस्था सुधारने की जगह स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ताजा मामला मीना देवी नाम की बुजुर्ग महिला का है, जिनकी मौत एक सड़क हादसे में हो गई थी। परिजनों ने बताया कि वे 12 दिनों तक अस्पताल के चक्कर काटते रहे, लेकिन महिला का शव उन्हें नहीं सौंपा गया। हालत यह रही कि मजबूरी में परिजनों को पुआल से पुतला बनाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। गरीब परिवार अब गांव में चंदा जुटाकर श्राद्धकर्म कर रहा है। यह घटना मानवीय संवेदनाओं और प्रशासनिक संवेदनहीनता के बीच की गहरी खाई को उजागर करती है।
घटना का एक और पहलू ये है कि हादसे के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के काफिले ने घायल मां-बेटे को अस्पताल पहुंचाया था। इसके बावजूद भी अस्पताल प्रशासन की निष्क्रियता ने परिजनों को निराश किया। शव की गुमशुदगी पर अस्पताल की चुप्पी ने इस पूरे मामले को और भी शर्मनाक बना दिया है।
यह कोई पहली घटना नहीं है जब NMCH सवालों के घेरे में आया हो। इससे पहले भी मरीज की उंगलियां चूहे कुतर चुके हैं और शव से अंग गायब होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बावजूद इसके न तो अस्पताल की व्यवस्थाओं में कोई सुधार हुआ और न ही जिम्मेदारों पर कोई सख्त कार्रवाई हुई। यह सब दर्शाता है कि स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के नाम पर केवल लापरवाही और अनदेखी का आलम है।
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