देहरादून जनपद में पंचायत चुनावों की नामांकन प्रक्रिया के दौरान वार्ड सदस्य पदों के लिए अपेक्षित रुचि नहीं दिखाई दी। जिले के छह विकासखंडों में कुल 3397 वार्ड सदस्य सीटों में से केवल 1556 पर ही उम्मीदवार सामने आए हैं, जबकि 671 पदों के लिए किसी ने भी नामांकन नहीं किया है। यह स्थिति ग्रामीण लोकतंत्र की बुनियाद माने जाने वाले वार्ड स्तर के प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता पैदा करती है।
चौंकाने वाली बात यह है कि जिन विकासखंडों में सबसे अधिक पद हैं, वहां भागीदारी सबसे कम रही है। उदाहरण के लिए चकराता विकासखंड में 841 पद हैं, लेकिन नामांकन करने वालों की संख्या मात्र 43 है। इसी प्रकार कालसी में 793 सीटों पर सिर्फ 46 प्रत्याशी ही सामने आए हैं। दूसरी ओर, सहसपुर और विकासनगर विकासखंड में कुछ हद तक प्रतिस्पर्धा दिखी, जहां अधिकांश सीटों पर उम्मीदवार मैदान में हैं।
इसके विपरीत ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए अच्छा प्रतिस्पर्धात्मक माहौल नजर आ रहा है। ग्राम प्रधान के 409 पदों पर 1018 उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर चुके हैं, जबकि कई स्थानों पर निर्विरोध चुनाव भी हुए हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य के 220 पदों के लिए 698 उम्मीदवार मैदान में हैं और जिला पंचायत सदस्य की 30 सीटों के लिए 113 लोगों ने नामांकन किया है।
यह स्थिति इस ओर इशारा करती है कि जहां बड़े पदों के लिए राजनीतिक सक्रियता और प्रतिस्पर्धा स्पष्ट रूप से नजर आती है, वहीं वार्ड स्तर पर प्रतिनिधित्व को लेकर आम जनता या संभावित प्रत्याशियों में अब भी उदासीनता बनी हुई है। यदि जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मज़बूत बनाना है तो वार्ड सदस्यों के चुनाव को लेकर जन-जागरूकता और प्रेरणा की आवश्यकता है।
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