भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक मंच पर आक्रामक रुख अपनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी सरकार ने सात प्रतिनिधिमंडलों को प्रमुख साझेदार देशों में भेजने की योजना बनाई है, ताकि पाकिस्तान के आतंक समर्थक चेहरे को बेनकाब किया जा सके। हाल ही में आदमपुर एयरबेस जाकर पीएम मोदी ने पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा पर सीधा हमला बोला, जिससे पड़ोसी देश की बौखलाहट और बढ़ गई।
भारत की इस कूटनीतिक चाल की नकल करते हुए पाकिस्तान ने भी अपने स्तर पर एक जवाबी रणनीति तैयार की है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी को जिम्मेदारी सौंपी है कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की छवि को बचाने का प्रयास करें। बिलावल ने खुद ‘एक्स’ पर यह घोषणा की कि उन्हें शांति के संदेश के साथ पाकिस्तान का पक्ष रखने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करना है।
पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने एक ओर भारत से बातचीत की गुहार लगाई, तो दूसरी ओर आतंकवाद को लेकर कोई ठोस कार्रवाई न करना पाकिस्तान की दोहरी नीति को उजागर करता है। उन्होंने मीडिया को बताया कि संघर्ष विराम कायम है और आगे बातचीत की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
भारत सरकार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पहलगाम हमले के बाद आतंकवाद के खिलाफ अपनी वैश्विक मुहिम को और तेज कर रही है। किरेन रिजिजू द्वारा घोषित सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का मकसद है – दुनिया को यह संदेश देना कि भारत आतंकवाद के किसी भी रूप को बर्दाश्त नहीं करेगा और पाकिस्तान को इस मुद्दे पर किसी भी मंच पर बख्शा नहीं जाएगा।
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