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भाई दूज के शुभ अवसर पर शीतकाल के लिए बंद होंगे बाबा केदारनाथ के कपाट, पंचमुखी डोली को किया जाएगा मंदिर में विराजमान

On: October 21, 2025 5:22 PM
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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित विश्वप्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 23 अक्टूबर, भाई दूज के शुभ अवसर पर परंपरानुसार शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने से पूर्व मंदिर परिसर को लगभग 12 क्विंटल रंग-बिरंगे पुष्पों से भव्य रूप से सजाया गया है, जो श्रद्धालुओं के लिए एक अनुपम आध्यात्मिक दृश्य प्रस्तुत कर रहा है।
कपाट बंद होने की यह प्रक्रिया परंपरागत धार्मिक विधियों के अनुसार सम्पन्न की जाएगी। बुधवार को विशेष पूजा-अर्चना के साथ बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह डोली को मंदिर के गर्भगृह में विधिविधान से विराजमान किया जाएगा।
23 अक्टूबर को ऐसे बंद होंगे कपाट
भाई दूज के दिन, प्रातः 4:30 बजे बाबा केदारनाथ की विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और आरती सम्पन्न की जाएगी। इसके पश्चात ‘समाधि पूजा’ की जाएगी, जिसमें भगवान को शीतकालीन समाधि दी जाती है। ठीक 8:30 बजे गर्भगृह के कपाट विधिपूर्वक बंद कर दिए जाएंगे।
इसके बाद सभा मंडप में विराजमान पंचमुखी डोली को बाहर लाकर पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ मुख्य और पिछले दोनों कपाटों को सील किया जाएगा। इसी दिन बाबा की चल विग्रह डोली रात्रि विश्राम के लिए रामपुर रवाना होगी।
पंचमुखी डोली का शीतकालीन यात्रा क्रम
• 24 अक्टूबर को डोली रामपुर से प्रस्थान कर फाटा और नारायनकोटी होते हुए गुप्तकाशी स्थित विश्वनाथ मंदिर पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम होगा।
• 25 अक्टूबर को डोली अंतिम पड़ाव ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी, जो बाबा केदारनाथ का शीतकालीन गद्दीस्थल है।
अगले छह महीनों तक बाबा केदार की नित्य पूजा, दर्शन और अनुष्ठान यहीं सम्पन्न होंगे। यह स्थल शीतकाल में भक्तों के लिए केदारनाथ के दर्शनों का प्रमुख माध्यम बन जाता है।
मंदिर समिति की तैयारियाँ अंतिम चरण में
बदरी-केदार मंदिर समिति द्वारा कपाट बंद करने को लेकर सभी आवश्यक तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी वाई. एस. पुष्पवाण के अनुसार, यह सुनिश्चित किया गया है कि कपाट बंद होने की पूरी प्रक्रिया शास्त्रोक्त और पारंपरिक विधियों के अनुरूप सम्पन्न हो।
श्रद्धालुओं के लिए यह एक भावनात्मक पल होता है, जब बाबा केदारनाथ हिमावरण में लुप्त हो जाते हैं और दर्शन के लिए उन्हें ऊखीमठ की ओर विदा किया जाता है। इस दौरान हज़ारों श्रद्धालु कपाट बंद होने के दर्शन हेतु धाम में उपस्थित रहते हैं।

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