उत्तराखंड के बहुचर्चित एनएच-74 घोटाले में सरकारी अधिकारियों द्वारा की गई अनियमितताओं का बड़ा खुलासा हुआ है। इस घोटाले में कई पीसीएस अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने मिलीभगत कर अपात्र लोगों को करोड़ों रुपये का मुआवजा बांटा। यह मामला वर्ष 2017 में तब सामने आया, जब राज्य सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग-74 के चौड़ीकरण में भूमि अधिग्रहण के तहत वितरित मुआवजे की गहन जांच करवाई।
जांच में पाया गया कि अधिकारियों ने कृषि भूमि को अकृषक दिखाकर अधिक मुआवजा जारी किया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस मामले में लगभग 250 से 400 करोड़ रुपये तक की अनियमितता की आशंका जताई गई थी। आयुक्त कुमाऊं की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन सरकार ने मार्च 2017 में आठ पीसीएस अधिकारियों को प्रथम दृष्टया दोषी माना।
इस घोटाले की जांच एसआईटी और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई, जिसमें कई अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में जेल भेजा गया। ईडी ने इस मामले में अब तक 8 करोड़ रुपये से अधिक की धन शोधन की पुष्टि की है। जांच एजेंसियों ने इस मामले को उत्तराखंड का सबसे बड़ा भूमि मुआवजा घोटाला करार दिया है।
एनएच-74 प्रकरण से यह स्पष्ट होता है कि किस प्रकार अफसरशाही और भ्रष्टाचार की मिलीभगत से सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग किया गया। अब इस पूरे मामले में दोषी अधिकारियों पर कानूनी शिकंजा कसने की प्रक्रिया तेज हो गई है, और उम्मीद है कि आने वाले समय में कड़ी सजा के साथ एक सख्त मिसाल पेश की जाएगी।
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