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पश्चिमी rajasthan के (jodhpur district) के कापरडा गांव के पास 70 (demoiselle cranes) यानि कुरजा (सारस) पक्षी मृत पाए गए हैं. एक साथ बड़ी संख्या में कुरजा की मौत ने खतरे की घंटी बजा दी है. मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में पक्षियों की  (Newcastle disease) के कारण हो रही है. न्यूकैसल सीधा पक्षियों के श्वसन ट्रैक को प्रभावित करता है. हालांकि, बड़ी संख्या में विसरा नमूने ले लिए गए हैं. जिनका टेस्ट किया जा रहा है. Test की report के बाद ही पक्षियों की मौत के पीछे का सही कारण सामने आ पाएगा.वहीं वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे 150 पक्षी हैं जो अब इस बीमारी से ग्रसित होने के कारण उड़ नहीं सकते हैं. दरअसल न्यूकैसल रोग पैरामाइक्सोवायरस परिवार से संबंधित वायरस के कारण होता है. वन विभाग ने पक्षियों के विसरा नमूने आगे की जांच के लिए आईवीआरआई लैब भोपाल भेजे हैं. वन विभाग के प्रमुख डीएन पांडे का कहना है कि रिपोर्ट के बाद है कुछ कहा जा सकेगा कि आखिर इतने पक्षियों की मौत क्यों हो रही है.
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राजस्थान हर साल आते हैं ये पक्षी 
प्रवासी सारस october में मंगोलिया और काकेशस की आर्द्रभूमि से राजस्थान के मारवाड़ और फलोदी क्षेत्रों के विभिन्न हिस्सों में हजारो km की उड़ान भरते हैं. ये प्रवासी पक्षी अपने घर वापस लौटने से पहले करीब पांच महीने तक यहीं रहते हैं. वहीं चिड़ियाएं सर्दियों के महीनों के दौरान अपने घर कीचन से लगभग 200 किमी दूर कापरडा में अपना घर बनाती हैं. वन विभाग का अनुमान है कि कापरडा में करीब 300 प्रवासी सारस हैं.

paralysis का शिकार हुए सारस 
जोधपुर में पक्षियों का इलाज कर रहे डॉ श्रवण सिंह राठौर का कहना है कि कम से कम 70 सारस मर गए हैं और लगभग 150 बीमार हैं और पानी में भी नहीं चल रहे हैं, जिसका अर्थ है कि उन्हें लकवा हो सकता है. डॉक्टर का कहना है कि पहली दृष्टि में न्यूकैसल रोग का मामला लगता है. हालांकि, विसरा की लैब रिपोर्ट मिलने के बाद ही सही कारण पता चल पाएगा. उन्होंने कहा कि पक्षियों की पोस्टमॉर्टम जांच से पता चलता है कि इसके पीछे वायरस है, फेफड़े और आंतें संक्रमित हैं और ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी आई है.वहीं उन्होंने बताया कि 2016 में भी राजस्थान में 35 पक्षियों की इसी बीमारी से मौत हुई थी.हर साल हजारों प्रवासी सारस आते हैं राजस्थान

150 सारस को पैरालिसिस
जोधपुर में पक्षियों का इलाज कर रहे डॉ श्रवण सिंह राठौर का कहना है कि कम से कम 70 सारस मर गए हैं और लगभग 150 बीमार हैं और पानी में भी नहीं चल रहे हैं, जिसका अर्थ है कि उन्हें लकवा हो सकता है. डॉक्टर का कहना है कि पहली दृष्टि में न्यूकैसल रोग का मामला लगता है. हालांकि, विसरा की लैब रिपोर्ट मिलने के बाद ही सही कारण पता चल पाएगा. उन्होंने कहा कि पक्षियों की postmartum जांच से पता चलता है कि इसके पीछे वायरस है, फेफड़े और आंतें संक्रमित हैं और ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी आई है.

वहीं उन्होंने बताया कि 2016 में भी rajathan में 35 पक्षियों की इसी बीमारी से मौत हुई थी.
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