नैनीताल। नैनीताल दुष्कर्म मामले ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीड़िता के परिजनों से फोन पर बात कर उन्हें हरसंभव सहायता और न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अमानवीय कृत्य को अंजाम देने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन और पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि पीड़िता और उसके परिवार को पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाए और मामले की जांच में कोई कोताही न हो। उन्होंने जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया कि वे व्यक्तिगत रूप से पीड़िता के परिवार से मिलकर उनकी जरूरतों का आकलन करें और हर संभव मदद सुनिश्चित करें।
शिक्षा और आर्थिक सहायता की जिम्मेदारी ली सरकार ने
मुख्यमंत्री धामी ने पीड़िता और उसकी बहन की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने का ऐलान किया है। उन्होंने समाज कल्याण विभाग को निर्देशित किया है कि दोनों बहनों को राज्य की स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ा जाए और उन्हें दी जाने वाली अनुमन्य आर्थिक सहायता की प्रक्रिया को त्वरित रूप से पूरा किया जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि इस सहायता को शनिवार तक उपलब्ध करा दिया जाए।
दोषियों को दिलाई जाएगी कठोर सजा
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार इस प्रकार की घटनाओं को बिल्कुल भी सहन नहीं करेगी। दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर, कठोरतम सजा दिलाने के लिए त्वरित जांच प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि मानवता के विरुद्ध किया गया घोर अपराध है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नैनीताल पूरी तरह सुरक्षित, कानून व्यवस्था नियंत्रण में
नैनीताल के जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि शहर की कानून व्यवस्था पूरी तरह से नियंत्रण में है। पर्यटकों और आम नागरिकों के लिए नैनीताल पूरी तरह से सुरक्षित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
राज्य सरकार की इस संवेदनशील और दृढ़ प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री धामी का यह कदम न केवल पीड़िता के परिवार के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि समाज में यह संदेश भी देता है कि अपराध चाहे जितना भी संगीन क्यों न हो, न्याय से बचा नहीं जा सकता।






