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बिहार विधानसभा में धनबल और महिला प्रतिनिधित्व की तस्वीर: 2005 से 2020 तक का सफर

On: May 20, 2025 3:35 AM
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बिहार विधानसभा चुनावों का इतिहास न सिर्फ राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से दिलचस्प रहा है, बल्कि इसमें विधायकों की आर्थिक स्थिति और महिला प्रतिनिधित्व की बदलती तस्वीर भी महत्वपूर्ण रही है। 2005 में हुए विधानसभा चुनावों में जहां सिर्फ 3% विधायक करोड़पति थे, वहीं 2020 तक ये आंकड़ा बढ़कर 81% तक पहुंच गया। इसी दौरान महिला विधायकों की भागीदारी में भी मामूली बदलाव देखा गया, लेकिन प्रतिनिधित्व के मामले में वे अब भी काफी पीछे हैं।

2005 के आंकड़े बताते हैं कि उस समय केवल 8 विधायक करोड़पति थे, और उनकी औसत संपत्ति 27 लाख रुपये के आसपास थी। जदयू के राजू कुमार सिंह उस समय सबसे अमीर विधायक थे, जिनकी संपत्ति 6 करोड़ रुपये से अधिक थी। महिला विधायकों की संख्या 35 थी, जो कुल सदस्यों का महज 14% थी। यह आंकड़ा उस समय की राजनीति में महिलाओं की सीमित भागीदारी को दर्शाता है।

2010 में जैसे-जैसे राजनीति में धनबल की भूमिका बढ़ी, वैसे-वैसे विधायकों की औसत संपत्ति भी तेजी से बढ़ने लगी। इस चुनाव में कुल 48 विधायक करोड़पति बने, जिनकी औसत संपत्ति 81 लाख रुपये रही। इस बार सबसे अमीर विधायक थे डॉ. फैयाज अहमद, जिनके पास 15 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति थी। इस समय महिला उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी, लेकिन विजयी महिला विधायकों की भागीदारी अब भी सीमित रही।

यह आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि बिहार की राजनीति में आर्थिक ताकत और बाहुबल का असर लगातार बढ़ा है, जबकि महिला भागीदारी अब भी सीमित दायरे में सिमटी हुई है। आगामी 2025 चुनावों में यह देखना रोचक होगा कि क्या ये रुझान बदलेगा या फिर इतिहास खुद को दोहराएगा।

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