Anti-Mobile Exercise: 5 Big Questions Over Viral Video
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Anti-Mobile Exercise: मोबाइल छुड़ाने के लिए स्कूल ने कराया ऐसा ड्रामा, बच्चों के चीखने-रोने का वीडियो वायरल

On: September 23, 2026 1:56 PM
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Anti-Mobile Exercise school drama video involving children in Khatima Uttarakhand

Anti-Mobile Exercise: उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के खटीमा से सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में कुछ छोटे बच्चे एक कथित डरावने दृश्य को देखकर घबराते और चीखते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह पूरा आयोजन बच्चों को मोबाइल फोन की लत से दूर रखने के उद्देश्य से किया गया था। स्कूल की ओर से आयोजित इस गतिविधि को Anti-Mobile Exercise का नाम दिया गया था।

स्कूल प्रबंधन का कहना है कि वीडियो में दिखाई देने वाला दृश्य वास्तविक नहीं था, बल्कि बच्चों को मोबाइल फोन के कथित दुष्प्रभाव समझाने के लिए एक काल्पनिक नाटक का हिस्सा था। हालांकि, वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर स्कूल के तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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क्या है Anti-Mobile Exercise का पूरा मामला?

यह मामला खटीमा स्थित एक निजी मोंटेसरी स्कूल से जुड़ा बताया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन के अनुसार, बच्चों में मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए Anti-Mobile Exercise आयोजित की गई थी।

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स्कूल का मानना था कि मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से बच्चों का पढ़ाई और दूसरी गतिविधियों से ध्यान हट सकता है। इसी संदेश को बच्चों तक पहुंचाने के लिए स्कूल में एक नाटकीय गतिविधि आयोजित की गई।

इस गतिविधि में मोबाइल के दुष्प्रभाव को एक डरावने दृश्य के जरिए दिखाने की कोशिश की गई। लेकिन छोटे बच्चों ने इसे मनोरंजन या सामान्य नाटक के तौर पर लेने के बजाय गंभीरता से ले लिया। वीडियो में कुछ बच्चे घबराए हुए दिखाई देते हैं और कुछ के रोने तथा चीखने की आवाजें सुनाई देने की बात कही जा रही है।

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वायरल वीडियो में ऐसा क्या दिखा?

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को देखकर कुछ लोगों को ऐसा लगा कि स्कूल में किसी बच्चे के साथ वास्तविक रूप से गंभीर घटना हो रही है। वीडियो के कुछ हिस्सों में ऐसा दृश्य दिखाई देता है, जिससे यह भ्रम पैदा होता है कि बच्चे को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

इसी वजह से वीडियो के वायरल होते ही लोगों की प्रतिक्रिया सामने आने लगी। सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाया कि छोटे बच्चों को मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए इस तरह के भयावह दृश्य दिखाना कितना उचित है।

हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने इन आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है। प्रबंधन के मुताबिक, वीडियो में किसी बच्चे की आंख नहीं निकाली गई और न ही किसी बच्चे को वास्तविक रूप से इस तरह का नुकसान पहुंचाया गया।

स्कूल ने दी सफाई, बताया नाटक का हिस्सा

विवाद बढ़ने के बाद स्कूल प्रबंधन ने वायरल वीडियो को लेकर अपनी सफाई दी। स्कूल की ओर से बताया गया कि यह एक काल्पनिक नाटक था, जिसे Anti-Mobile Exercise के तहत आयोजित किया गया था।

प्रबंधन के अनुसार, इस गतिविधि का उद्देश्य बच्चों को मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल के संभावित दुष्प्रभावों के बारे में समझाना था। वीडियो के एक हिस्से को संदर्भ से अलग करके देखने की वजह से लोगों को यह वास्तविक घटना जैसा लग रहा है।

स्कूल का कहना है कि आयोजन में किसी बच्चे को शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचाया गया। वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला दृश्य एक नाटकीय प्रस्तुति थी।

मोबाइल की लत छुड़ाने की कोशिश, लेकिन बच्चे डर गए

Anti-Mobile Exercise के पीछे स्कूल का उद्देश्य बच्चों को मोबाइल से दूरी बनाने के लिए प्रेरित करना था। आजकल कम उम्र के बच्चों में मोबाइल फोन का इस्तेमाल बढ़ने को लेकर अभिभावक और शिक्षक दोनों चिंतित रहते हैं।

पढ़ाई, खेल और सामाजिक गतिविधियों के बजाय लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत को लेकर स्कूलों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। खटीमा के इस स्कूल में भी इसी उद्देश्य से अलग तरह की गतिविधि की गई।

लेकिन इस मामले में तरीका चर्चा का कारण बन गया। छोटे बच्चों के सामने डरावना दृश्य प्रस्तुत किए जाने के बाद कुछ बच्चे घबरा गए। वीडियो में बच्चों की प्रतिक्रिया ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा।

सोशल मीडिया पर उठे सवाल

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने स्कूल की Anti-Mobile Exercise को लेकर कई सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि बच्चों को किसी आदत के नुकसान समझाने के लिए जागरूकता और संवाद का तरीका अपनाया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर यह सवाल भी उठाया गया कि क्या छोटे बच्चों की उम्र और उनकी मानसिक समझ को ध्यान में रखकर गतिविधि तैयार की गई थी। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि बच्चों के लिए बनाए गए जागरूकता कार्यक्रम में डर पैदा करने वाले दृश्यों से बचना चाहिए।

हालांकि, स्कूल प्रबंधन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को डराना या नुकसान पहुंचाना नहीं था।

क्या मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए डर जरूरी है?

इस घटना ने बच्चों को मोबाइल से दूर रखने के तरीकों को लेकर भी बहस शुरू कर दी है। विशेषज्ञों की सलाह के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचे बिना इतना जरूर कहा जा सकता है कि बच्चों को किसी भी आदत के फायदे और नुकसान समझाने में उनकी उम्र और भावनात्मक स्थिति को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होता है।

Anti-Mobile Exercise जैसे जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों को डिजिटल डिवाइस के संतुलित इस्तेमाल के बारे में समझाना हो सकता है। इसके लिए बातचीत, खेल, आउटडोर गतिविधियां और स्क्रीन टाइम की स्पष्ट सीमाएं जैसे तरीके भी अपनाए जा सकते हैं।

अब वायरल वीडियो पर स्कूल की सफाई

फिलहाल खटीमा के इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्कूल प्रबंधन ने वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे दृश्य को वास्तविक घटना मानने से इनकार किया है। स्कूल के मुताबिक, यह पूरी गतिविधि एक काल्पनिक नाटक थी और किसी बच्चे की आंख या शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया।

वहीं, वीडियो देखने के बाद लोगों की चिंता इस बात को लेकर है कि छोटे बच्चों के लिए ऐसी प्रस्तुति कितनी उपयुक्त थी। Anti-Mobile Exercise को लेकर उठे विवाद के बीच अब यह मामला सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना हुआ है।

आखिर बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखने के लिए जागरूकता का कौन-सा तरीका सही है और कौन-सा तरीका उन्हें डराने वाला साबित हो सकता है, इस सवाल पर भी चर्चा तेज हो गई है।

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