सावन का पावन महीना शुरू होते ही देशभर में कांवड़ यात्रा का सिलसिला तेज हो गया है। लाखों श्रद्धालु विभिन्न राज्यों से गंगाजल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करने के लिए पैदल यात्रा कर रहे हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ मार्ग पर सुरक्षा और निगरानी के उद्देश्य से एक नया निर्देश जारी किया है, जिसके तहत सभी दुकानदारों को अपने प्रतिष्ठानों पर QR कोड लगाना अनिवार्य किया गया है।
सरकार के इस फैसले के अनुसार, हर दुकान पर लगाया जाने वाला QR कोड उस दुकान के मालिक की पूरी पहचान और जानकारी को दर्शाएगा। यह कदम सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उठाया गया है। हालांकि, अब इस फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकारों से पूछा है कि दुकानों पर QR कोड लगाने के आदेश के पीछे क्या कारण हैं। जस्टिस एमएम सुंद्रेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए दोनों राज्यों को अगले मंगलवार तक स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान यूपी और उत्तराखंड की ओर से पेश हुए एडवोकेट जनरल जीतेंद्र कुमार सेठी ने कोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील शादान फरासत ने इसका विरोध करते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा अगले 10 से 12 दिनों में समाप्त हो जाएगी, इसलिए इतनी देर करना व्यर्थ होगा। इस पर सहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों को केवल एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।
अब सबकी नजरें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के जवाब पर टिकी हैं, जिसमें उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि QR कोड लगाने का यह निर्णय क्यों लिया गया और इसके पीछे क्या उद्देश्य है।
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