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इटावा में केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति से भड़के उत्तराखंड के तीर्थ पुरोहित, कहा – परंपरा और आस्था से खिलवाड़

On: July 18, 2025 6:50 AM
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रुद्रप्रयाग | उत्तर प्रदेश के इटावा में बन रही केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति ने उत्तराखंड के धार्मिक समुदाय को आक्रोशित कर दिया है। बदरीनाथ-केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे धार्मिक आस्थाओं व मंदिरों की अस्मिता पर सीधा प्रहार बताया है। तीर्थ पुरोहितों ने मांग की है कि इस निर्माण को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से भड़का विवाद

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने श्रावण मास के पहले सोमवार को इटावा स्थित मंदिर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में दिख रहा मंदिर उत्तराखंड के केदारनाथ धाम से मेल खाता है और उसका नाम ‘केदारेश्वर महादेव मंदिर’ बताया गया है। मंदिर का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पूजा-अर्चना करती नजर आ रही है।

तीर्थ पुरोहितों ने जताया विरोध, कहा – परंपरा की नकल और अपमान

केदारसभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने इसे मंदिर परंपरा की नकल बताते हुए कहा कि इससे न सिर्फ धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, बल्कि यह हिंदू मंदिर संस्कृति की गरिमा के साथ खिलवाड़ है। वहीं, चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के उपाध्यक्ष संतोष त्रिवेदी ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण नहीं रोका गया तो तीर्थ पुरोहित उत्तर प्रदेश जाकर अखिलेश यादव के आवास के बाहर धरना देंगे।

कोटेश्वर धाम के महंत शिवानंद गिरी महाराज ने इस तरह के निर्माण को हिंदू धर्म को कमजोर करने की कोशिश करार दिया और उत्तराखंड सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की।

मंदिर समिति भी आई विरोध में, कानूनी कार्रवाई की तैयारी

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने भी इस मसले पर विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि मंदिर की प्रतिकृति के निर्माण को लेकर कानूनी सलाह ली जा रही है, और आवश्यकता पड़ी तो उचित विधिक कार्रवाई की जाएगी।

वर्ष 2021 में रखी गई थी नींव, 50 करोड़ की लागत

यह मंदिर इटावा के सफारी पार्क के सामने ‘केदारेश्वर महादेव मंदिर’ के नाम से बन रहा है, जिसकी आधारशिला वर्ष 2021 में अखिलेश यादव ने स्वयं रखी थी। मंदिर की ऊंचाई 72 फीट है और इसे केदारनाथ मंदिर से एक इंच छोटा बनाया गया है। इसकी निर्माण लागत 40 से 50 करोड़ रुपये आंकी गई है। मंदिर निर्माण में आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के इंजीनियर, वास्तु विशेषज्ञ और शोधकर्ता शामिल हैं।

दिल्ली में भी उठ चुका है ऐसा विवाद

यह पहला मौका नहीं है जब केदारनाथ धाम की प्रतिकृति को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो। वर्ष 2023 में दिल्ली में भी इसी प्रकार का मंदिर निर्माण प्रस्तावित किया गया था, लेकिन तीर्थ पुरोहितों के विरोध और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हस्तक्षेप से निर्माण कार्य रुकवा दिया गया था।

सरकार ने चारधाम के नाम के दुरुपयोग पर लगाई थी रोक

दिल्ली वाले मामले के बाद उत्तराखंड सरकार ने 18 जुलाई 2024 को कैबिनेट में एक कड़ा प्रस्ताव पारित किया था। इसमें स्पष्ट किया गया कि चारधाम (केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) के नाम, स्वरूप और प्रतिष्ठा का अनुकरण कर मंदिर निर्माण करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। धर्मस्व विभाग को इस प्रस्ताव को विधिक रूप देने के निर्देश दिए गए थे।

तीर्थ पुरोहितों को सरकार से सख्त कदम की उम्मीद

उत्तराखंड के तीर्थ पुरोहितों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिन्होंने दिल्ली के मामले में सख्त रुख अपनाया था, इटावा मामले में भी वैसी ही कठोर कार्यवाही करेंगे और धार्मिक परंपराओं की गरिमा की रक्षा करेंगे।

निष्कर्ष:
इटावा में बन रही केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति ने उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला केवल मंदिर की नकल का नहीं, बल्कि धार्मिक पहचान और परंपरा की रक्षा का भी है। ऐसे में सभी की नजर अब उत्तराखंड सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

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