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International Tiger Day : सीएम धामी का ऐलान, टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स में तैनात होंगे अग्निवीर

On: July 29, 2025 4:35 PM
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देहरादून – अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि राज्य में बाघों और उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा के लिए विशेष टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (TPF) का गठन किया जा रहा है। यह बल न केवल वन्यजीव संरक्षण को मजबूती देगा, बल्कि ‘अग्निवीर योजना’ के अंतर्गत प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फोर्स का मुख्य उद्देश्य बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उनके आवासीय क्षेत्रों को संरक्षित रखना और अवैध शिकार जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाना होगा। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में तैनात की जाने वाली इस फोर्स में उत्तराखंड के 80 से अधिक अग्निवीरों को सीधे नियुक्त किया जाएगा।

अवैध गतिविधियों पर लगेगा नियंत्रण
सीएम धामी ने बताया कि टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स की जिम्मेदारी सिर्फ बाघों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। यह बल जंगलों में हो रही लकड़ी की तस्करी, अवैध खनन, अतिक्रमण और अन्य वन्य अपराधों पर भी कड़ी निगरानी रखेगा। इसके साथ ही, यह फोर्स मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थितियों को भी प्रभावी ढंग से नियंत्रित करेगी। बाघों के रिहायशी क्षेत्रों में पहुंचने पर यह बल उन्हें सुरक्षित तरीके से जंगल में वापस भेजने का कार्य करेगा, जिससे इंसानों और वन्यजीवों दोनों को नुकसान से बचाया जा सके।

अग्निवीरों को मिलेगा विशेष मौका
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना से प्रशिक्षण प्राप्त अग्निवीरों को टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स में शामिल करने का निर्णय, बाघ संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम है। सेना का अनुशासन, शारीरिक फिटनेस और मानसिक मजबूती, अग्निवीरों को वन क्षेत्रों में गश्त लगाने और अपराधों से निपटने में बेहद सक्षम बनाएगी। यह पहल न केवल वन्यजीव सुरक्षा को सशक्त करेगी, बल्कि सैन्य पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए सम्मानजनक करियर का मार्ग भी खोलेगी।

स्थानीय भागीदारी से बनेगा सकारात्मक माहौल
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि अग्निवीरों की भर्ती से स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी बढ़ेगी, जिससे वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि कॉर्बेट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशिक्षित बल की तैनाती से अवैध शिकार की घटनाओं में कमी आने की पूरी संभावना है।

यह कदम न केवल उत्तराखंड में बाघों की संख्या और सुरक्षा को बढ़ावा देगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने का एक सुनहरा अवसर भी बनकर सामने आएगा।

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