देहरादून। इंग्लैंड दौरे के लिए घोषित 18 सदस्यीय भारतीय टेस्ट टीम में देहरादून के लाल अभिमन्यु ईश्वरन को शामिल किया गया है। 20 जून से शुरू हो रहे इस दौरे के लिए भारतीय टीम की कप्तानी शुभमन गिल को सौंपी गई है, जबकि विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत उपकप्तान की भूमिका में नजर आएंगे। देहरादून में क्रिकेट की बुनियादी शिक्षा लेने वाले अभिमन्यु का चयन पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय बन गया है।
अभिमन्यु ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत देहरादून से की। गुनियाल गांव स्थित उनके पिता आरपी ईश्वरन द्वारा संचालित ‘अभिमन्यु क्रिकेट एकेडमी’ में उन्होंने बल्लेबाजी की बारीकियां सीखीं। क्रिकेट कोचिंग के लिए खास तौर पर बनाई गई यह एकेडमी कभी आरपी ईश्वरन का सपना थी, जिसे उन्होंने अपने बेटे के लिए साकार किया। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट रहे आरपी ईश्वरन ने अपने बेटे के भविष्य के लिए अकाउंटेंसी छोड़ दी और पूरी तरह से क्रिकेट कोचिंग में लग गए।
अभिमन्यु की प्रतिभा ने उन्हें 10 साल की उम्र में बंगाल पहुंचाया, जहां उन्होंने वर्षों तक घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया। बंगाल टीम के कप्तान रहते हुए उन्होंने रणजी ट्रॉफी 2022 में उत्तराखंड के खिलाफ नाबाद 141 रनों की यादगार पारी खेली थी। यह मैच खास इसलिए भी था क्योंकि यह उनके पिता द्वारा बनाए गए उसी ग्राउंड पर खेला गया, जहां से उन्होंने क्रिकेट की शुरुआत की थी।
उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट 2013-14 की रणजी ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल में आया, जहां उन्होंने सुदीप चटर्जी के साथ 163 रनों की साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने 2016-17 में बंगाल की टीम से इंटरस्टेट टी-20 टूर्नामेंट में पदार्पण किया। देवधर ट्रॉफी और दलीप ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। खासकर 2019-20 के दलीप ट्रॉफी फाइनल में ग्रीन टीम के खिलाफ उनकी 153 रनों की पारी आज भी याद की जाती है।
अभिमन्यु के चयन से न केवल उनके परिवार में खुशी का माहौल है, बल्कि पूरे उत्तराखंड में भी उत्साह की लहर है। उनके पिता का कहना है कि यह उपलब्धि उनके त्याग और मेहनत का फल है। मूल रूप से चेन्नई के रहने वाले आरपी ईश्वरन देहरादून आकर बस गए थे, जहां उनकी शादी बेला से हुई। अभिमन्यु उनके दो बच्चों में छोटे हैं, उनकी बड़ी बहन पल्लवी भी इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं।
आज जब अभिमन्यु भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा हैं, तो देहरादून से लेकर बंगाल तक हर कोई उन्हें शुभकामनाएं दे रहा है। यह सफलता न सिर्फ एक खिलाड़ी की मेहनत की कहानी है, बल्कि एक पिता के समर्पण और सपनों की उड़ान भी है।





