उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में 11वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ऐतिहासिक क्षणों का साक्षी बना। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश की पहली योग नीति का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने घोषणा की कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में दो नए योग नगर बसाए जाएंगे, जो न केवल योग, आयुर्वेद और अध्यात्म के केंद्र बनेंगे, बल्कि उत्तराखंड को वैश्विक वेलनेस मानचित्र पर नई पहचान भी दिलाएंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इन योग नगरों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक गुरु, संस्थान और वेलनेस सेक्टर के विशेषज्ञ आमंत्रित किए जाएंगे, जिससे राज्य को वैश्विक आयाम मिलेगा। साथ ही गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में एक-एक “आध्यात्मिक आर्थिक क्षेत्र” (Spiritual Economic Zone) की स्थापना की जाएगी, जो आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रमुख केंद्र होंगे।
सीएम धामी ने कहा कि यह नीति उत्तराखंड की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और योग परंपरा को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक उत्तराखंड में पांच नए योग हब स्थापित किए जाएं। इसके अलावा मार्च 2026 तक राज्य के सभी आयुष हेल्थ और वेलनेस सेंटरों में योग सेवाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में आठ मित्र देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और अन्य प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने योग दिवस को और भी विशेष बना दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि योग उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य की जीवनशैली का हिस्सा रहा है और अब समय आ गया है कि इस ‘संजीवनी’ का लाभ पूरी दुनिया को दिया जाए।






