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उत्तराखंड में करोड़ों की ड्रग्स तस्करी का खुलासा: नेपाल सीमा पर महिला के पास मिली एमडीएमए की भारी खेप, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच शुरू

On: July 13, 2025 8:28 AM
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चंपावत/पिथौरागढ़। उत्तराखंड में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बड़ी सफलता हाथ लगी है। चंपावत जिले में पहली बार दो जिलों की पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 5.688 किलोग्राम मिथाइलीन डाइऑक्सी मेथैम्फेटामाइन (एमडीएमए) जब्त की गई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 10.23 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह ड्रग्स एक महिला के पास से बरामद हुई, जबकि उसका पति और एक अन्य आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस इस मामले को एक संगठित अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट से जोड़कर जांच कर रही है।

नेपाल सीमा पर चेकिंग में हुई बड़ी बरामदगी

शनिवार सुबह नेपाल सीमा से सटे बनबसा क्षेत्र में पुलिस ने चेकिंग अभियान चलाया। सीओ टनकपुर वंदना वर्मा के नेतृत्व में एसओजी प्रभारी लक्ष्मण सिंह जगवान और बनबसा थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह कोरंगा की टीम ने शारदा नहर के पास एक महिला और पुरुष को संदिग्ध हालात में देखा। रोकने की कोशिश की गई तो पुरुष भाग गया। महिला की तलाशी लेने पर उसके बैग से भारी मात्रा में एमडीएमए बरामद हुई।

महिला गिरफ्तार, पति और सहयोगी फरार

गिरफ्तार महिला की पहचान ईशा (22), निवासी पंपापुर, बनबसा के रूप में हुई है। पूछताछ में उसने बताया कि भागने वाला उसका पति राहुल कुमार था और ड्रग्स उसके पति व सहयोगी कुनाल कोहली (निवासी टनकपुर) ने उसे दी थी। दोनों फरार हैं, जिनकी तलाश पुलिस द्वारा की जा रही है। महिला के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

पिथौरागढ़ के मुर्गी फार्म में थी गुप्त ड्रग लैब

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि ड्रग्स का निर्माण पिथौरागढ़ जिले के थल क्षेत्र में एक मुर्गी फार्म के अंदर स्थित गुप्त लैब में किया गया था। जून माह में यहां ड्रग्स बनाई गई और वाहनों में छिपाकर निकाली गई। 26 जून को मुंबई पुलिस और थल पुलिस की संयुक्त छापेमारी में लैब को ध्वस्त किया गया, लेकिन मुख्य आरोपी पहले ही फरार हो चुके थे।

महाराष्ट्र पुलिस की कार्रवाई से मिला सुराग

ड्रग्स नेटवर्क के इस खुलासे की शुरुआत महाराष्ट्र पुलिस की कार्रवाई से हुई। हाल ही में ठाणे पुलिस ने 10 ग्राम एमडीएमए के साथ एक आरोपी को पकड़ा, जिसने पूछताछ में उत्तराखंड से सप्लाई की बात कबूली। इसके बाद मुंबई पुलिस की सूचना पर कुमाऊं रेंज की टीम हरकत में आई और चंपावत व पिथौरागढ़ पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से यह सफलता मिली।

क्लब कल्चर में तेजी से बढ़ रहा एमडीएमए का उपयोग

एमडीएमए एक सिंथेटिक ड्रग है जिसे ‘म्याऊ-म्याऊ’, ‘मॉली’, ‘एमडी’, ‘एक्स्टसी’ जैसे नामों से जाना जाता है। यह कोकीन की तरह तेज असर दिखाता है और मेट्रो शहरों व क्लबों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। महंगे नशे के विकल्प के रूप में युवा वर्ग इसका अधिक इस्तेमाल कर रहा है।

कुनाल कोहली ने की है केमिस्ट्री की पढ़ाई, तकनीकी जानकारी से बना रहा ड्रग

पुलिस के अनुसार आरोपी कुनाल कोहली ने रसायन विज्ञान की पढ़ाई की है और मुंबई में रहता है। उसे ड्रग बनाने के तकनीकी ज्ञान की पूरी जानकारी है। जबकि राहुल कुमार की टनकपुर में मोबाइल शॉप है और वह अक्सर मुंबई आता-जाता रहता था। पुलिस यह पता लगा रही है कि कुनाल ने ड्रग बनाना कहाँ और कैसे सीखा।

ड्रग्स को शारदा नहर में फेंकने की थी योजना

पूछताछ में ईशा ने बताया कि उसके पति ने 27 जून को उसे ड्रग्स सौंपे थे, ताकि वह 12 जुलाई को उसे शारदा नहर में फेंक दे। इससे पहले ही पुलिस ने उसे पकड़ लिया। फरार आरोपी कुनाल को ठाणे पुलिस भी पहले से एक अन्य केस में वांछित मान रही है।

अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच, नेपाल व नाइजीरिया से संभावित लिंक

एसपी अजय गणपति ने बताया कि पुलिस इस ड्रग नेटवर्क के नेपाल व नाइजीरिया से संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच कर रही है। पिथौरागढ़ में बनी लैब से मेट्रो शहरों तक ड्रग्स की सप्लाई की जा रही थी।

2025 में अब तक 11 करोड़ की ड्रग्स बरामद

पुलिस के मुताबिक वर्ष 2025 में अब तक 11 करोड़ से अधिक मूल्य की ड्रग्स जब्त की जा चुकी हैं। वहीं, 2024 में 1.28 किग्रा स्मैक और 60.5 किग्रा चरस समेत कुल 4 करोड़ रुपये की नशे की सामग्री पकड़ी गई थी।

पुलिस टीम को 20 हजार का इनाम

इस बड़ी सफलता पर आईजी कुमाऊं रिद्धिम अग्रवाल ने पुलिस टीम को 20,000 रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया है। टीम में सीओ वंदना वर्मा, प्रभारी लक्ष्मण सिंह जगवान, एसओ बनबसा सुरेंद्र कोरंगा समेत पिथौरागढ़ एसओजी प्रभारी प्रकाश पांडे और अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।

यह कार्रवाई न केवल उत्तराखंड पुलिस की मुस्तैदी को दर्शाती है, बल्कि राज्य में तेजी से फैल रहे सिंथेटिक ड्रग रैकेट के खिलाफ एक महत्वपूर्ण प्रहार भी है। मामले में अन्य राज्यों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भी सहयोग लिया जा सकता है।

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