सावन के पावन अवसर पर हरिद्वार से जल भरकर शिवभक्तों का जनसैलाब अपने-अपने गंतव्यों की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है। श्रद्धा और भक्ति की मिसाल बने ये भक्त नंगे पांव, “हर-हर महादेव” और “बम बम भोले” के जयघोष के साथ कांवड़ यात्रा के मार्गों को भगवामय करते दिखाई दे रहे हैं।
इस बीच दिल्ली की भाजपा विधायक पूनम भारद्वाज भी आस्था के इस महासंगम में शामिल हुईं। उन्होंने कांवड़ यात्रा में भाग लेकर शिवभक्ति के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। बारिश के बावजूद शिवभक्तों के कदम रुके नहीं। भीगते हुए भी श्रद्धालु हरिद्वार से जल लेकर पूरे जोश और भक्ति भाव से आगे बढ़ते रहे।
जैसे-जैसे सावन शिवरात्रि की ओर अग्रसर हो रहा है, वैसे-वैसे कांवड़ मार्गों पर भक्तों की संख्या में जबरदस्त इजाफा देखने को मिल रहा है। बुधवार को तो मानो पूरा कांवड़ मार्ग भगवा रंग में डूब गया। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से आए भक्तों ने पूरे मार्ग को जयघोष से गूंजा दिया। वहीं, लंबे समय से परेशान कर रही धूप से राहत भी मिली, जब बुधवार को हल्की बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया और भक्तों के चेहरों पर ताजगी छा गई।
सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया सेवा कार्य, कांवड़ियों पर बरसाए फूल
भाजपा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी आस्था के इस महापर्व में सहभागिता निभाई। उन्होंने हरिद्वार-रुड़की हाईवे पर कांवड़ियों का स्वागत करते हुए उनके ऊपर पुष्प वर्षा की और उनके लिए फल व पानी की बोतलें वितरित कीं। उन्होंने कहा कि उनका जीवन सेवा को समर्पित है, और कांवड़ यात्रा में सेवा करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने सभी शिवभक्तों से संयम और श्रद्धा बनाए रखने की अपील की।
सांसद रावत ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्थावानों का एक महापर्व है, जिसमें हर कोई अपनी श्रद्धा के अनुसार भागीदारी कर सकता है। उन्होंने सभी से अनुरोध किया कि इस परंपरा की गरिमा को बनाए रखें और प्रशासन का पूर्ण सहयोग करें।
हरेला पर्व पर किया पौधरोपण
कांवड़ सेवा के पूर्व सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरेला पर्व पर पौधरोपण भी किया। उन्होंने कहा कि हरेला केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी है। हर व्यक्ति को कम से कम एक पौधा जरूर लगाना चाहिए। इस मौके पर बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।
कुल मिलाकर, शिवभक्ति, सेवा और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का यह संगम न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक चेतना का भी परिचायक बन गया है।
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