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हल्द्वानी: CM धामी के कार्यक्रम स्थल के पास कार में मिला बैंक्वेट हॉल स्वामी का शव, इलाके में मचा हड़कंप

On: February 28, 2026 9:22 AM
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हल्द्वानी (नैनीताल)। उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर से एक हृदयविदारक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के शहर में प्रस्तावित भ्रमण और कार्यक्रम के बीच, कार्यक्रम स्थल के बिल्कुल समीप एक लग्जरी कार में शहर के प्रतिष्ठित कारोबारी का शव मिलने से हड़कंप मच गया है। इस घटना ने न केवल पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी है, बल्कि वीवीआईपी (VVIP) सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
घटना का विवरण: हाई-प्रोफाइल इलाके में संदिग्ध कार
शनिवार की सुबह जब हल्द्वानी पुलिस मुख्यमंत्री के आगमन की तैयारियों और सुरक्षा रिहर्सल में जुटी थी, तभी सुबह करीब 9:00 बजे पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली। सूचना के अनुसार, सुशीला तिवारी अस्पताल के पास—जो मुख्यमंत्री का प्रस्तावित रूट और कार्यक्रम स्थल का निकटतम क्षेत्र है—एक कार संदिग्ध परिस्थितियों में काफी समय से खड़ी थी।
मौके पर पहुँचे क्षेत्राधिकारी (CO) अमित कुमार और कोतवाल विजय मेहता ने देखा कि कार के सभी शीशे अंदर से लॉक थे और गाड़ी का इंजन चालू था। कार के भीतर एक व्यक्ति चालक की सीट पर बेसुध पड़ा था। पुलिस ने तत्काल शीशा तोड़कर जब व्यक्ति को बाहर निकाला, तो उनकी पहचान बरेली रोड स्थित मशहूर ‘घूँघट बैंक्वेट हॉल’ के स्वामी अरुण बिष्ट (45 वर्ष) के रूप में हुई।
चिकित्सा जांच और ‘डेथ मिस्ट्री’
अरुण बिष्ट को तुरंत पास के सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने परीक्षण के उपरांत उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ (मृत अवस्था में लाया गया) घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, जब शव को बाहर निकाला गया, तो वह अत्यधिक ठंडा (Hypothermic condition) पड़ चुका था, जिसका कारण कार के एसी (Air Conditioner) का लगातार कई घंटों तक चलना माना जा रहा है।
प्रारंभिक फॉरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस की थ्योरी के मुताबिक, बंद कार में लंबे समय तक एसी चलने से ऑक्सीजन की कमी और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के रिसाव (Asphyxiation) के कारण कारोबारी का दम घुट गया होगा। हालांकि, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या मौत से पहले उन्हें कोई हार्ट अटैक आया था या यह कोई गहरी साजिश है।
खुफिया विभाग और सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता
चूंकि शव मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल के पास मिला, इसलिए यह मामला केवल एक ‘दुखद मृत्यु’ तक सीमित नहीं रहा। उत्तराखंड पुलिस की इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) और खुफिया विभाग की टीमें तुरंत सक्रिय हो गईं।

  • सुरक्षा चूक की जांच: मुख्यमंत्री के आने से पहले पूरे क्षेत्र को ‘जीरो टॉलरेंस’ सुरक्षा जोन में बदला जाता है। ऐसे में एक संदिग्ध कार का घंटों वहां खड़ा रहना सुरक्षा में बड़ी चूक माना जा रहा है।
  • साक्ष्यों का संकलन: फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने कार के स्टीयरिंग, डैशबोर्ड और दरवाजों से फिंगरप्रिंट्स लिए हैं। कार के भीतर से मिले मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों को भी कब्जे में ले लिया गया है।
    जांच के पांच अहम सवाल:
    पुलिस की तफ्तीश अब निम्नलिखित बिंदुओं पर टिकी है:
  • समय का मिलान: अरुण बिष्ट घर से कब निकले थे और उनकी लोकेशन अंतिम बार कहाँ दर्ज हुई थी?
  • सीसीटीवी फुटेज: अस्पताल मार्ग और बैंक्वेट हॉल से कार्यक्रम स्थल तक लगे सीसीटीवी कैमरों में कार के पहुँचने का समय क्या था?
  • एसी थ्योरी: क्या कार के मैकेनिकल फॉल्ट के कारण गैस लीक हुई, या यह महज एक थकान के कारण लगी झपकी थी जो जानलेवा साबित हुई?
  • कॉल डिटेल्स (CDR): मौत से पहले अरुण बिष्ट ने आखिरी बार किससे बात की थी? क्या वे किसी तनाव में थे?
  • बाहरी हस्तक्षेप: क्या कार के पास कोई संदिग्ध व्यक्ति देखा गया था?
    व्यापारिक जगत और परिजनों में कोहराम
    अरुण बिष्ट हल्द्वानी के एक सफल और व्यवहार कुशल व्यवसायी माने जाते थे। उनके निधन की खबर जैसे ही बरेली रोड और मुखानी क्षेत्र में फैली, पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई। बैंक्वेट हॉल एसोसिएशन और स्थानीय व्यापारियों ने इसे शहर के लिए एक बड़ी क्षति बताया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे इस बात पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि कुछ घंटों पहले घर से निकला व्यक्ति अब इस दुनिया में नहीं है।
    पुलिस प्रशासन का आधिकारिक बयान
    नैनीताल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा, “मामला बेहद संवेदनशील है। हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिसकी वीडियोग्राफी भी कराई जा सकती है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल, सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद कर दिया गया है।”
    निष्कर्ष:
    हल्द्वानी की इस घटना ने एक तरफ एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है, तो दूसरी तरफ प्रशासन के सामने सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। क्या यह वास्तव में एक तकनीकी खराबी से हुई दुर्घटना है या इसके पीछे कोई गहरी मंशा छिपी है? इसका जवाब अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही मिल पाएगा।

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