​मोदी सरकार को बड़ा झटका: केंद्रीय राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी मंजूरी

​नई दिल्ली

केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और मोदी सरकार 3.0 में प्रमुख चेहरा रहे जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को अपने केंद्रीय राज्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनके इस इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार भी कर लिया है।


​जॉर्ज कुरियन मोदी कैबिनेट में अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के राज्यमंत्री (MoS) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत केंद्रीय मंत्रिपरिषद से जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है।

​क्यों छोड़ना पड़ा मंत्री पद? जानिए असली वजह

​जॉर्ज कुरियन के अचानक इस्तीफे के पीछे कोई राजनीतिक मनमुटाव नहीं, बल्कि संवैधानिक और तकनीकी कारण हैं। दरअसल, कुरियन मध्य प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य थे और हाल ही में उनका छह साल का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया है। भारतीय संविधान के नियमों के अनुसार, संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) का सदस्य न रहने पर कोई भी व्यक्ति छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर नहीं रह सकता।


​चूंकि भारतीय जनता पार्टी ने हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में जॉर्ज कुरियन को दोबारा मैदान में नहीं उतारने का फैसला किया था, इसलिए कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनका इस्तीफा देना अनिवार्य हो गया था। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि केरल विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी की रणनीतियों और क्षेत्रीय प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें दोबारा उच्च सदन में नहीं भेजा गया।

​मोदी सरकार का एकमात्र ईसाई चेहरा थे जॉर्ज कुरियन

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी कैबिनेट में जॉर्ज कुरियन का एक विशेष महत्व था। वह मौजूदा केंद्रीय मंत्रिपरिषद में ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले इकलौते मंत्री थे। ऐसे में उनके इस्तीफे के बाद अब मोदी सरकार के सामाजिक और धार्मिक संतुलन को बनाए रखने के लिए कैबिनेट में नए फेरबदल की सुगबुगाहट भी तेज हो गई है।

राजनीति के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय और मत्स्य पालन विभाग की जिम्मेदारी किसी अन्य वरिष्ठ नेता को सौंपी जा सकती है।

​1980 से बीजेपी के निष्ठावान सिपाही: ऐसा रहा राजनीतिक सफर

​65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन भारतीय जनता पार्टी के उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जो साल 1980 में पार्टी की स्थापना के समय से ही इसके साथ जुड़े हुए हैं। उनका लंबा राजनीतिक जीवन संगठन को मजबूत करने में बीता है।

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  • ​जन्म और शिक्षा: कुरियन का जन्म 20 सितंबर, 1960 को केरल के कोट्टायम जिले की एट्टुमानूर नगरपालिका के अंतर्गत नाम्बियाकुलम में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा स्थानीय स्तर पर पूरी करने के बाद कानून (Law) की पढ़ाई की। वह कानूनी मामलों के अच्छे जानकार हैं और देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में वकील के तौर पर भी प्रैक्टिस कर चुके हैं।
  • ​संगठन में भूमिका: वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के विशेष कार्याधिकारी (OSD) के रूप में भी उन्होंने प्रशासनिक अनुभव हासिल किया था।
  • ​कैबिनेट में एंट्री: मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें एक बड़े चौंकाने वाले चेहरे के रूप में शामिल किया गया था। उन्होंने 9 जून, 2024 को केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में गोपनीयता की शपथ ली थी और 11 जून, 2024 को अपने मंत्रालयों का कार्यभार संभाला था।

​आगामी राजनीतिक समीकरणों पर क्या होगा असर?

​जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा केरल भाजपा के सांगठनिक ढांचे और आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। दक्षिण भारत, विशेषकर केरल में ईसाइयों के बीच भाजपा की पैठ बनाने के लिए कुरियन को एक मजबूत कड़ी माना जाता रहा है। अब मंत्री पद से हटने के बाद संगठन में उनकी क्या भूमिका होगी और क्या भाजपा केरल में अपनी जड़ों को मजबूत करने के लिए उन्हें किसी नई और बड़ी जिम्मेदारी से नवाजेगी, इस पर सभी राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें टिकी हुई हैं।

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