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उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के खिलाफ देहरादून में इंजीनियरों का विरोध प्रदर्शन, 9 जुलाई को हड़ताल की चेतावनी

On: July 2, 2025 4:38 PM
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देहरादून। उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में उत्तराखंड के बिजली इंजीनियरों ने देहरादून में जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत किया गया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि निजीकरण की योजना पर अमल किया गया तो 9 जुलाई को हड़ताल की जाएगी।

प्रदर्शन में शामिल अभियंताओं ने निजीकरण को आम उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ बताया। उनका कहना था कि यह कदम सीधे तौर पर गरीब और मध्यम वर्गीय उपभोक्ताओं पर भारी आर्थिक बोझ डालेगा। निजी कंपनियों को बिजली वितरण सौंपने से सब्सिडी खत्म हो जाएगी और उपभोक्ताओं को 10 से 12 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदनी पड़ेगी, जो उन्हें अंधेरे की ओर धकेल सकती है।

सरकार पर आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ का आरोप

आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे और महासचिव पी. रत्नाकर राव ने उत्तर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर घाटे के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है ताकि निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा सके। उन्होंने यह भी उजागर किया कि राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों पर 14,400 करोड़ रुपये का बकाया बिजली बिल है, जिसे नजरअंदाज कर निजीकरण को तर्कसंगत ठहराया जा रहा है।

जनविरोधी नीति के खिलाफ एकजुट हुआ इंजीनियरिंग समुदाय

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिजली जैसी बुनियादी सेवा को मुनाफे का जरिया बनाना जनता के साथ अन्याय है। निजीकरण से बिजली महंगी हो जाएगी और इससे आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकती है। उन्होंने इसे जनविरोधी नीति करार दिया और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की।

देहरादून में हुए इस विरोध प्रदर्शन में उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विवेक राजपूत, अभियंता जसवंत सिंह, एन.एस. बिष्ट, सौरभ पांडे, मोहित डबराल, प्रदीप पंत, बृजेश यादव, सुभाष कुमार और धनंजय कुमार सहित कई अभियंता शामिल रहे। सभी ने मिलकर 9 जुलाई को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प दोहराया।

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