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दिल्ली के प्रदूषण की मार उत्तराखंड पर भारी, करीब 5000 ट्रकों की आवाजाही ठप

On: December 19, 2025 9:38 AM
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दिल्ली में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए लागू किए गए सख्त पर्यावरणीय प्रतिबंधों का सीधा असर अब उत्तराखंड के ट्रांसपोर्ट और औद्योगिक सेक्टर पर दिखाई देने लगा है। दिल्ली में बीएस-4 और उससे नीचे मानक वाले डीजल ट्रकों के प्रवेश पर रोक लगने से उत्तराखंड के लगभग 5000 ट्रक सड़कों से बाहर हो गए हैं। इसका नतीजा यह है कि दवाइयों, औद्योगिक कच्चे माल और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
दिल्ली-एनसीआर जाने वाले हजारों ट्रक बॉर्डर पर फंसे
देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, काशीपुर और सिडकुल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों से दिल्ली-एनसीआर की ओर जाने वाले बड़ी संख्या में ट्रक पुराने मानकों के हैं। जैसे ही दिल्ली में प्रतिबंध लागू हुआ, गाजीपुर, गाजियाबाद और अन्य सीमावर्ती चेक पोस्ट पर इन ट्रकों को रोक दिया गया। कई ट्रक माल से लदे हुए खड़े हैं, जिससे समय पर डिलीवरी न होने और सामान के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। इससे न केवल व्यापारियों को नुकसान हो रहा है, बल्कि सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है।
फार्मा और उद्योगों पर सीधा असर
उत्तराखंड से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में दवाइयों, पैकेजिंग सामग्री, ऑटो पार्ट्स और अन्य औद्योगिक कच्चे माल की नियमित आपूर्ति होती है। ट्रकों की आवाजाही रुकने से फार्मास्युटिकल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर सीधा प्रभाव पड़ा है। उद्योग जगत का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो उत्पादन लागत बढ़ेगी और अंततः इसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
ट्रांसपोर्टरों को रोजाना करोड़ों का नुकसान
ट्रांसपोर्ट यूनियन के प्रतिनिधि एपी उनियाल के अनुसार, ट्रकों के खड़े रहने से ट्रांसपोर्ट सेक्टर को रोजाना करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। छोटे और मध्यम ट्रांसपोर्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बीएस-6 मानक के नए ट्रक खरीदना उनकी आर्थिक क्षमता से बाहर होता जा रहा है। नए ट्रकों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि पुराने ट्रक अभी भी लोन में फंसे हुए हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्टर सरकार से अस्थायी राहत या चरणबद्ध व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
बसों को मिली राहत, यात्रियों ने ली चैन की सांस
दिल्ली में प्रतिबंधों के चलते उत्तराखंड परिवहन निगम की बीएस-4 डीजल बसों के संचालन पर भी रोक लगने की आशंका थी, जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी हो सकती थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 10 साल से कम पुरानी डीजल बसों को संचालन की अनुमति मिल गई। इससे दिल्ली और उत्तराखंड के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को राहत जरूर मिली, लेकिन माल ढुलाई से जुड़ा संकट अब भी बना हुआ है।
केवल बीएस-6 वाहनों को अनुमति, विकल्प सीमित
वर्तमान में दिल्ली में सिर्फ बीएस-6 और नए मानकों वाले वाहनों को ही प्रवेश की इजाजत है। इससे उत्तराखंड के ट्रांसपोर्ट सेक्टर के सामने विकल्प बेहद सीमित हो गए हैं। कुछ ट्रांसपोर्टर वैकल्पिक रास्तों से माल भेजने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इससे दूरी बढ़ रही है और लागत भी काफी ज्यादा हो रही है।
सरकार से व्यावहारिक समाधान की मांग
ट्रांसपोर्टरों और उद्योग जगत ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को संतुलित रखने के लिए व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। उद्योगपति अनिल मारवाह का कहना है कि वैकल्पिक ईंधन, चरणबद्ध प्रतिबंध, वित्तीय सहायता और आसान लोन जैसी व्यवस्थाओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि पर्यावरण भी सुरक्षित रहे और उद्योग व रोजगार पर भी संकट न आए।

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