मुख्य बिंदु:
- हादसे का वक्त: बुधवार तड़के करीब 3:00 से 3:30 बजे के बीच।
- घटनास्थल: राजस्थान के दौसा जिले का कोलवा थाना क्षेत्र (दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे)।
- रूट: हरिद्वार से सवारियां लेकर इंदौर जा रही थी निजी स्लीपर बस।
- बड़ा अपडेट: टक्कर के बाद बस में लगी भीषण आग, सोते हुए यात्रियों को संभलने का नहीं मिला मौका।
दौसा/जयपुर:
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बुधवार तड़के एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। राजस्थान के दौसा जिले में एक तेज रफ्तार निजी स्लीपर बस और खाली ट्रेलर (ट्रॉली ट्रक) के बीच हुई भीषण भिड़ंत में सात यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई।
टक्कर इतनी भयावह थी कि बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गहरी खाई में जा गिरी और उसमें देखते ही देखते आग का तांडव शुरू हो गया। इस हादसे में महिलाओं और बच्चों समेत 19 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
हरिद्वार से इंदौर जा रही थी बस, तड़के 3 बजे चीख-पुकार में बदली नींद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना दौसा के कोलवा थाना इलाके में एक हाईवे रेस्ट एरिया के समीप हुई। निजी ट्रेवल कंपनी की यह स्लीपर बस धार्मिक नगरी हरिद्वार से यात्रियों को लेकर मध्य प्रदेश के इंदौर की तरफ जा रही थी। बुधवार तड़के करीब 3:00 से 3:30 बजे के बीच, जब एक्सप्रेसवे पर सन्नाटा था और बस में सवार अधिकांश यात्री गहरी नींद में सो रहे थे, तभी यह हादसा हुआ।
शुरुआती जांच और चश्मदीदों के मुताबिक, मुंबई की ओर जा रहे एक खाली ट्रॉली ट्रक (ट्रेलर) और बस में साइड से ओवरटेक करने की होड़ मची थी। इसी दौरान दोनों वाहनों में जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर लगते ही बस चालक अपना नियंत्रण खो बैठा और बस लहराते हुए हाईवे के किनारे बनी गहरी खाई में पलट गई।
भिड़ंत के तुरंत बाद भड़की आग, ऊपरी केबिन में सो रहे यात्री नीचे गिरे
चश्मदीदों ने बताया कि टक्कर की आवाज इतनी जोरदार थी कि मानो कोई बम फटा हो। हादसे के तुरंत बाद बस के पिछले हिस्से में शॉर्ट सर्किट या डीजल टैंक फटने के कारण भीषण आग लग गई। सुबह का वक्त होने के कारण यात्रियों को संभलने का बिल्कुल मौका नहीं मिला। भिड़ंत के झटके से स्लीपर केबिन की ऊपरी सीटों पर सो रहे यात्री सीधे नीचे आ गिरे, जिससे कई लोग गंभीर रूप से चोटिल होकर अंदर ही फंस गए।
आग की लपटों को आसमान छूते देख हाईवे से गुजर रहे अन्य वाहन चालकों और स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत हिम्मत दिखाई। बस की खिड़कियां और शीशे तोड़कर कुछ यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि अंदर फंसे सात लोग आग की चपेट में आने और गंभीर चोटों के कारण जिंदगी की जंग हार गए।
प्रशासनिक अमले में हड़कंप, आला अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय कोलवा थाना पुलिस, हाईवे पेट्रोलिंग टीम, फायर ब्रिगेड और कई एम्बुलेंस गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए दौसा के पुलिस अधीक्षक (SP), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेंद्र फौजदार, डिप्टी एसपी धर्मेंद्र कुमार और उपखंड अधिकारी (SDM) संजू मीणा तुरंत जिला अस्पताल पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने घायलों के उपचार की व्यवस्था का जायजा लिया और डॉक्टरों की विशेष टीम को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए। कुछ यात्रियों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें जयपुर के हायर मेडिकल सेंटर (SMS अस्पताल) रेफर किया गया है।
ओवरटेकिंग या झपकी बनी हादसे की वजह? जांच में जुटी पुलिस
दौसा पुलिस अधीक्षक ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला तेज रफ्तार में साइड से ओवरटेक करने का लग रहा है। हालांकि, यह आशंका भी जताई जा रही है कि तड़के के समय बस ड्राइवर को नींद की झपकी आ गई होगी, जिसके कारण वह आगे चल रहे ट्रेलर से दूरी नहीं बना पाया।
पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बस और ट्रेलर को अपने कब्जे में लेकर क्रेन की मदद से एक्सप्रेसवे से हटवा दिया है ताकि यातायात सुचारू रूप से चल सके। पुलिस ने मामला दर्ज कर कानूनी जांच शुरू कर दी है और मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवाकर उनके परिजनों को सूचित कर दिया है।
इस हादसे ने एक बार फिर एक्सप्रेसवे पर रात और तड़के के समय वाहनों की नियंत्रित गति और ड्राइवरों की फिटनेस को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।










