अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चम्पावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उधम सिंह नगर उत्तरकाशी

देहरादून के रिटायर्ड कुलपति 12 दिन तक रहे डिजिटल अरेस्ट में, 1.47 करोड़ की ठगी करने वाला आरोपी हिमाचल से दबोचा गया

On: September 1, 2025 9:43 AM
Follow Us:

देहरादून: साइबर अपराधियों ने एक रिटायर्ड कुलपति को जाल में फंसाकर 1.47 करोड़ रुपये की बड़ी ठगी को अंजाम दिया। ठगों ने खुद को महाराष्ट्र पुलिस के साइबर क्राइम विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ित को “डिजिटल अरेस्ट” में डाल दिया और 12 दिन तक व्हाट्सएप कॉल पर डरा-धमकाकर मोटी रकम वसूल ली। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी को हिमाचल प्रदेश के सोलन से गिरफ्तार किया है।

कैसे हुआ डिजिटल अरेस्ट?

नैनीताल निवासी और महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ने साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि अगस्त माह में अज्ञात लोगों ने उनसे संपर्क किया और खुद को महाराष्ट्र साइबर क्राइम विभाग से बताते हुए कहा कि उनके नाम पर एक बैंक खाते में 60 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है, जो मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।

ठगों ने पीड़ित को विश्वास में लेने के लिए कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी की धमकी दी। इसके बाद व्हाट्सएप कॉल पर लगातार संपर्क में रहकर कहा गया कि उनके बैंक खातों का वेरिफिकेशन किया जाएगा। इसी दौरान उन्हें बाहर किसी से बात न करने और लगातार कॉल पर बने रहने का दबाव बनाया गया। डर के माहौल में फंसे रिटायर्ड कुलपति ने अलग-अलग खातों में कुल 1.47 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।

आरोपी की गिरफ्तारी

पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरे साइबर ठगी रैकेट में राजेंद्र कुमार निवासी सोलन, हिमाचल प्रदेश शामिल है। एसटीएफ उत्तराखंड की टीम ने आरोपी को दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से नेट बैंकिंग के लिए इस्तेमाल मोबाइल नंबर, घटना के समय का मोबाइल डिवाइस, वाई-फाई राउटर, चेकबुक और फर्जी फर्म से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए।

एसटीएफ एसएसपी नवनीत भुल्लर ने बताया कि आरोपी ने पीड़ित को महाराष्ट्र साइबर क्राइम विभाग का अधिकारी बनकर भ्रमित किया। यहां तक कि एक अन्य व्यक्ति के केस में जब्त हुए खाते से जोड़कर भी उन्हें फंसाया गया।

कैसे काम करता है डिजिटल अरेस्ट ठगी गैंग?

पुलिस के अनुसार, “डिजिटल अरेस्ट” साइबर अपराधियों का नया तरीका है। इसमें वे फोन, व्हाट्सएप या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई या इनकम टैक्स अफसर बताकर लोगों को डराते हैं। वे झूठा केस दर्ज होने की धमकी देते हैं और कहते हैं कि व्यक्ति डिजिटल अरेस्ट में है। इसके बाद लगातार कॉल पर रखकर दबाव बनाते हैं और पीड़ित से बड़ी रकम हड़प लेते हैं।

सावधान रहें, रिपोर्ट करें

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं है। कोई भी अधिकारी इस तरह से फोन या कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकता। यदि कभी कोई व्यक्ति इस तरह की धमकी देता है तो तुरंत इसकी शिकायत cybercrime.gov.in पर करें या फिर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।

इस घटना ने साफ कर दिया है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी नई चाल से ठग अब लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसलिए जागरूक रहें और किसी भी कॉल पर डरकर अपनी मेहनत की कमाई न गंवाएं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

Vice President Uttarakhand Visit: दो दिवसीय दौरे पर देहरादून पहुंचे उपराष्ट्रपति, एलबीएसएनएए और आईजीएनएफए के कार्यक्रमों में करेंगे शिरकत

Ankita Bhandari Murder Case Uttarakhand High Court hearing and Pulkit Arya bail rejection news visual.

Ankita Bhandari Murder Case: पुलकित आर्य समेत तीनों दोषियों को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

​आज दून पहुंचेंगे उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, घर से निकलने से पहले चेक कर लें रूट डायवर्जन प्लान

Damaged car and loader at road accident site near Manimai temple in Dehradun with emergency responders.

देहरादून में दर्दनाक सड़क हादसा: मणिमाई मंदिर के पास खड़े लोडर से टकराई तेज रफ्तार कार, 2 की मौके पर मौत, 3 की हालत नाजुक

Haridwar Murder Case crime scene investigation by police near Gangnahar in Manglaur.

​Haridwar Murder Case: मंगलौर में सौतेली मां की निर्मम हत्या, बेटी और उसका प्रेमी हिरासत में

Uttarakhand Tunnel Collapse: Death toll rises, two workers still missing; search operation underway.

Uttarakhand Tunnel Collapse: मौतों का आंकड़ा बढ़ा, दो मजदूर अब भी लापता, तलाश अभियान जारी

Leave a Comment