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देहरादून की हवा बनी जानलेवा, AQI 300 के पार; दिल्ली-बागपत जैसे हालात

On: December 30, 2025 6:05 AM
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देहरादून में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। बीते दो दिनों से राजधानी की हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी हुई है। सोमवार को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 312 रिकॉर्ड किया गया, जबकि रविवार को यह 301 था। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि देहरादून की हवा अब देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल दिल्ली और बागपत जैसी हो गई है।
सर्दियों के मौसम में मैदानी इलाकों में छाई घनी धुंध और कोहरे की वजह से प्रदूषण शहर के ऊपर ही ठहर गया है। इससे खास तौर पर दमा और सांस से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों, बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रदूषण का यह स्तर बरकरार रहा, तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य समस्याएं और भी गंभीर रूप ले सकती हैं।
चिंता की बात यह है कि यह उच्च AQI दून विश्वविद्यालय की ऑब्ज़र्वेटरी में दर्ज किया गया है, जो शहर के अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर स्थित है। ऐसे में घंटाघर, गांधी रोड, प्रिंस चौक और अन्य व्यस्त क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर इससे कहीं अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में बनने वाली कोहरे और धुंध की परत प्रदूषक कणों को वातावरण में फैलने से रोक देती है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, कूड़ा जलाने की घटनाएं और खुले में अलाव जलाना स्थिति को और अधिक गंभीर बना रहे हैं। दून घाटी में स्थित होने के कारण यहां हवा की गति धीमी रहती है, जिससे प्रदूषित हवा बाहर नहीं निकल पाती। ठंडी और भारी हवा के चलते पीएम-2.5 जैसे सूक्ष्म कण लंबे समय तक हवा में बने रहते हैं, जो सीधे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं।
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अमित पोखरियाल के मुताबिक सर्दियों के दौरान प्रदूषण का स्तर कम नहीं हो पाता और हवा में जमा रहता है, जिससे AQI लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि तापमान बढ़ने और ठंड का असर कम होने के बाद ही प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है। वहीं चिकित्सकों का कहना है कि AQI 200 के पार पहुंचते ही स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ने लगते हैं।

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