राजधानी देहरादून में मानवीय संवेदना की मिसाल उस समय देखने को मिली जब 72 वर्षीय बुजुर्ग महिला सरस्वती देवी, तीन शादीशुदा बेटों के होते हुए भी महीनों से राशन के लिए दर-दर भटकने के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचीं और जिलाधिकारी सविन बंसल से न्याय की गुहार लगाई।
अजबपुर निवासी सरस्वती देवी ने जिलाधिकारी को बताया कि उनके तीनों बेटे अब अपने-अपने परिवारों के साथ अलग रहते हैं और अब अंतिम पुत्र भी उनसे अलग हो गया है। ऐसे में उनका गुजारा केवल विधवा पेंशन से होता है। लेकिन पूर्ति विभाग द्वारा सूची में नाम न होने का हवाला देकर उन्हें राशन देने से इनकार किया जा रहा था, जबकि पूर्व में वह नियमित रूप से राशन प्राप्त करती थीं।
बुजुर्ग महिला की व्यथा सुनते ही जिलाधिकारी सविन बंसल ने पूर्ति विभाग के अधिकारियों को तलब किया और तत्काल महिला को राशन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। डीएम के एक्शन में आते ही विभागीय अधिकारी सक्रिय हो गए और कलेक्टेªट की कलम चलने से पहले ही सरस्वती देवी के पास पहुंचकर उनका राशन कार्ड बहाल कर दिया। उसी दिन उन्हें कोटे का खाद्यान्न भी उपलब्ध करा दिया गया।
इस मौके पर डीएम सविन बंसल ने सख्त संदेश देते हुए कहा,
“बुजुर्ग, महिलाओं, बच्चों और असहाय व्यक्तियों के साथ किसी भी प्रकार का शोषण या तिरस्कार दण्डनीय अपराध है। ऐसे मामलों में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
जिलाधिकारी प्रतिदिन अपने कार्यालय में जनसुनवाई कर रहे हैं और व्यक्तिगत रूप से शिकायतों की मॉनिटरिंग कर संबंधित अधिकारियों से समाधान की रिपोर्ट मांग रहे हैं।
इस संवेदनशील और तत्पर कार्रवाई से साफ है कि प्रशासन आमजन के हक और सम्मान को लेकर पूरी तरह सजग है।
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