देहरादून। उत्तर प्रदेश में सामने आए अवैध मतांतरण के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसके तार अब उत्तराखंड तक गहराई से जुड़ते दिख रहे हैं। ताजा खुलासे में देहरादून के शंकरपुर सहसपुर निवासी अब्दुल रहमान का नाम सामने आया है, जो न केवल खुद मतांतरित हुआ, बल्कि उसने युवतियों को बहला-फुसलाकर मतांतरण कराने और गिरोह में शामिल करने का भी काम किया।
2012 में जुड़ा था मुख्य सरगना से संपर्क में
पुलिस जांच में सामने आया है कि अब्दुल रहमान वर्ष 2012 में धर्मांतरण गिरोह के मुख्य सरगना जलाउद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के संपर्क में आया। छांगुर ने उसे हिंदू युवतियों का मतांतरण कराने पर मोटे मुनाफे का लालच दिया। वर्ष 2013 में रहमान ने खुद मतांतरण कर मुस्लिम धर्म अपना लिया और धीरे-धीरे उत्तराखंड में इस नेटवर्क की कमान संभाल ली।
दो निकाह, आठ बच्चे
सूत्रों के अनुसार, मतांतरण के बाद रहमान ने दो निकाह किए—एक देहरादून में और दूसरा लखनऊ में। दोनों पत्नियों से उसके कुल आठ बच्चे हैं। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से छांगुर के संपर्क में रहते हुए उत्तराखंड में मतांतरण के नेटवर्क को सक्रिय रूप से चला रहा था।
रानीपोखरी बना गतिविधियों का केंद्र
रहमान ने देहरादून के रानीपोखरी क्षेत्र को अपने नेटवर्क का केंद्र बनाया, जहां उसने पांच युवक-युवतियों को अपने गिरोह में शामिल किया। इनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग शामिल हैं। ये लोग सोशल मीडिया के माध्यम से युवतियों से संपर्क करते और उन्हें रोजगार, पैसा और बेहतर जीवनशैली का झांसा देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करते थे।
इंटरनेट मीडिया बना हथियार
इसी दौरान रहमान ने सोशल मीडिया के माध्यम से रानीपोखरी की एक युवती से संपर्क किया और उसका मतांतरण कराया। बाद में यही युवती भी गिरोह के लिए काम करने लगी और उसने उत्तर प्रदेश, गोवा और दिल्ली में अन्य युवक-युवतियों को प्रभावित करने का प्रयास किया।
पुलिस को मिले अहम सुराग
पुलिस द्वारा की जा रही पूछताछ में युवती से कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुई हैं। इन जानकारियों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। साथ ही, उन युवतियों से भी संपर्क किया जा रहा है जिनका मतांतरण कराया गया था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश में है कि अब्दुल रहमान अब तक कितने लोगों का धर्म परिवर्तन करवा चुका है।
जांच जारी, गिरोह के और चेहरे उजागर होने की संभावना
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह केवल एक शुरुआत है और जैसे-जैसे पूछताछ आगे बढ़ेगी, मतांतरण गिरोह से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं। उत्तराखंड में गिरोह की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका खुलासा आने वाले दिनों में हो सकता है।
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