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मुख्यमंत्री धामी की सख्ती रंग लाई: भ्रष्टाचार के आरोप में पेयजल निगम के अधीक्षण अभियंता सुजीत कुमार विकास निलंबित

On: July 18, 2025 7:14 AM
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देहरादून। उत्तराखंड सरकार द्वारा भ्रष्टाचार और कदाचार के मामलों में “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाने के निर्देशों का प्रभाव अब ज़मीन पर भी स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुपालन में ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है, जो सरकारी कार्यों के निर्वहन में अनियमितताओं और नैतिक आचरण के उल्लंघन में लिप्त पाए जा रहे हैं।

इसी क्रम में उत्तराखण्ड पेयजल निगम के अध्यक्ष शैलष बगोली ने बड़ी कार्रवाई करते हुए निगम के अधीक्षण अभियंता एवं प्रभारी मुख्य अभियंता (कु.) सुजीत कुमार विकास को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन करने और भ्रष्ट आचरण में संलिप्त रहने के गंभीर आरोप हैं।

पेयजल निगम द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, सुजीत कुमार विकास के विरुद्ध शिकायतकर्ता संजय कुमार ने गंभीर आरोप लगाए थे। संजय ने बताया कि वह विभाग की विभिन्न जल योजनाओं में पेटी कॉन्ट्रैक्टर के रूप में कार्य करता है। वर्ष 2022 में, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता सुजीत कुमार विकास ने उसे फर्म ‘हर्ष इंटरप्राइजेज’ का निगम में पंजीकरण कराने और ठेका दिलाने का आश्वासन दिया था। इसके बदले सुजीत कुमार के कहने पर संजय कुमार ने अपनी फर्म के माध्यम से 2-2 लाख की पांच किश्तों में कुल 10 लाख रुपये एक अन्य फर्म ‘कुचु-पुचु इंटरप्राइजेज’ के खाते में जमा कराए।

जांच में यह तथ्य सामने आया कि ‘कुचु-पुचु इंटरप्राइजेज’ की एक पार्टनर स्वयं सुजीत कुमार विकास की पत्नी रंजु कुमारी हैं। यह संलिप्तता, न केवल हितों के टकराव को दर्शाती है, बल्कि विभागीय आचरण नियमों का खुला उल्लंघन भी है। सुजीत कुमार को इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था, लेकिन वे संतोषजनक उत्तर देने में असफल रहे।

पेयजल निगम ने इसे गंभीर प्रकृति का भ्रष्टाचार मानते हुए निगम की अनुशासन एवं अपील विनियमावली के तहत कार्रवाई करते हुए सुजीत कुमार विकास को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें महाप्रबंधक (प्रशिक्षण), मानव संसाधन प्रकोष्ठ, उत्तराखण्ड पेयजल निगम, रुड़की से संबद्ध किया गया है।

इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत गया है कि उत्तराखंड सरकार भ्रष्टाचार के प्रति कोई ढील नहीं बरतेगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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