चारधाम यात्रा के दौरान हर साल लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं, जिससे भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है। इस बार राज्य सरकार ने यात्रा को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शहरी विकास विभाग, पंचायती राज विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड संयुक्त रूप से मिशन मोड में काम कर रहे हैं।
सरकार की योजना के तहत चारों धामों में अत्याधुनिक प्लास्टिक कंपैक्टर और बेलर मशीनें स्थापित की जा रही हैं। इन मशीनों की मदद से प्लास्टिक बोतलें और सिंगल यूज़ प्लास्टिक को दबाकर कंप्रेस किया जाएगा, ताकि उसे रिसाइकल किया जा सके और दोबारा उपयोग में लाया जा सके।
इसके साथ ही एक और अभिनव व्यवस्था शुरू की गई है। अब श्रद्धालुओं को पानी पीने के बाद खाली बोतलें दुकानदारों को लौटानी होंगी। इन बोतलों पर विशेष क्यूआर कोड चिपकाया गया है। बोतल लौटाने पर यात्रियों को प्रति बोतल 10 रुपये वापस दिए जा रहे हैं, जिससे लोग बोतलें फेंकने के बजाय लौटाने को प्रेरित हों।
यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि राज्य सरकार की जिम्मेदार पर्यटन नीति को भी दर्शाता है। शासन की इस कोशिश का उद्देश्य है कि आस्था और पर्यावरण दोनों की गरिमा बनी रहे।






