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Char Dham Yatra: यात्रा मार्ग पर 25 जगहों पर उपलब्ध ई-व्हीकल चार्जिंग सुविधा, सीएम धामी की पर्यावरणीय पहल ला रही असर

On: May 16, 2025 7:33 AM
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उत्तराखंड सरकार ने इस वर्ष चार धाम यात्रा को “हरित यात्रा” की थीम पर आयोजित करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत यात्रा मार्ग को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में कई ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल के अंतर्गत राज्य सरकार ने चार धाम यात्रा मार्ग पर इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना शुरू कर दी है।

राज्य सरकार की योजना के तहत कुल 38 स्थानों पर ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशन लगाए जाने हैं, जिनमें से इस यात्रा सीजन से 25 स्टेशनों को पहले ही शुरू कर दिया गया है। इन चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता के कारण अब चार धाम यात्रा मार्ग पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस वर्ष की यात्रा को हरित और टिकाऊ बनाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

परिवहन विभाग और टीएचडीसी (टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) मिलकर इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। विभाग द्वारा 28 और टीएचडीसी द्वारा 10 चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की जा रही है। इनमें से अधिकतर स्टेशन गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) की भूमि पर स्थापित किए गए हैं।

प्रत्येक चार्जिंग स्टेशन पर 60 किलोवाट क्षमता के यूनिवर्सल चार्जर लगाए गए हैं, जिनमें 30-30 किलोवाट की दो चार्जिंग गन शामिल हैं। इससे एक समय में दो वाहन आसानी से चार्ज हो सकते हैं।

गढ़वाल मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक विशाल मिश्रा ने बताया कि पर्यावरण हितैषी यात्रा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यात्रा मार्ग के प्रमुख पड़ावों पर चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की गई है, जिससे श्रद्धालु इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करें। अकेले रुद्रप्रयाग जिले में पर्यटन विभाग द्वारा संचालित चार जीएमवीएन गेस्ट हाउसों में चार्जिंग स्टेशनों की सुविधा शुरू की गई है।

ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशन इन प्रमुख स्थानों पर स्थापित किए गए हैं:
उत्तरकाशी, हरिद्वार, ऋषिकेश, मंगलौर, रुड़की, बड़कोट, स्यानाचट्टी, फूलचट्टी, जानकीचट्टी, कौडियाला, श्रीनगर, श्रीकोट, गौचर, कर्णप्रयाग, गैरसैंण, कालेश्वर, नंदप्रयाग, पीपलकोटी, औली, पांडुकेश्वर, बद्रीनाथ, स्यालसौड़, गुप्तकाशी, सोनप्रयाग और घनसाली।

इस तरह उत्तराखंड सरकार की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि भविष्य में टिकाऊ और स्वच्छ यात्रा प्रणाली की आधारशिला भी रखती है।

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